घनी आबादी में अवैध रिफिलिंग का काला कारोबार,खाद्य विभाग की शिकायत पर तीन नामजद सहित अन्य पर शासकीय कार्य में बाधा का मामला दर्ज
Junaid Khan - शहडोल। सोहागपुर के घनी आबादी वाले इलाके में लंबे समय से बेखौफ फल-फूल रहे अवैध गैस रिफिलिंग के काले कारोबार पर जब प्रशासनिक हथौड़ा चला, तो माफिया का बेखौफ और अड़ियल चेहरा सामने आ गया। औचक निरीक्षण करने पहुंची खाद्य विभाग की संयुक्त टीम के साथ न केवल धक्का-मुक्की और अभद्रता की गई, बल्कि शासकीय जब्ती में लिए गए गैस सिलेंडरों को भी दबंगई के बल पर जबरन छुड़ा लिया गया। इस दुस्साहस पर सोहागपुर पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए खाद्य निरीक्षक प्रदीप द्विवेदी की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने, गाली-गलौज और अन्य संगीन धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस की इस त्वरित व सख्त कार्रवाई से अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। पुराने आरोपी, वही पैंतरा,महिलाओं को आगे कर सरकारी टीम पर बनाया दबाव प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी रामजी गुप्ता, सुधीर गुप्ता और कौशलेन्द्र गुप्ता द्वारा संगठित तरीके से रिहाइशी इलाके में अवैध रूप से एलपीजी सिलेंडरों से गैस रिफिलिंग का खतरनाक खेल संचालित किया जा रहा था। स्थानीय निवासियों द्वारा लगातार की जा रही शिकायतों और विरोध के बावजूद आरोपी विवाद पर आमादा हो जाते थे। गुरुवार को जब खाद्य निरीक्षक प्रदीप द्विवेदी की अगुवाई में टीम ने दबिश दी और मौके से 13 सिलेंडर व रिफिलिंग में इस्तेमाल होने वाला नोजल जब्त किया, तो आरोपियों ने प्रशासनिक कार्रवाई को नाकाम करने के लिए घर की महिलाओं को ढाल बनाकर आगे कर दिया। देखते ही देखते परिवार के अन्य सदस्यों ने मजमा जुटाकर टीम पर भारी दबाव बनाया और जब्त सिलेंडर छीन लिए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में भी इन्हीं आरोपियों के विरुद्ध खाद्य विभाग द्वारा गैस रिफिलिंग के मामले में कार्रवाई की जा चुकी है, जिसके बावजूद इनके हौसले पस्त नहीं हुए। प्रशासनिक लाचारी पर उठे सवाल, क्या ढिलाई बरत रहे जिम्मेदार अधिकारी? घनी आबादी के बीच अवैध गैस रिफिलिंग किसी बड़े बारूद के ढेर पर बैठने जैसा है, जहाँ एक छोटी सी लापरवाही सैकड़ों जिंदगियों को लील सकती है। इसके बावजूद वर्ष 2024 की कार्रवाई के बाद भी यह अवैध धंधा बेधड़क कैसे चलता रहा? यह सवाल अब सीधे जिला प्रशासन, खाद्य आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय बीट पुलिस की कार्यशैली पर खड़े हो रहे हैं। आखिर पूर्व में हुई कार्रवाई के बाद सतत निगरानी क्यों नहीं रखी गई? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की ढिलाई के कारण ही माफिया के हौसले इतने बुलंद हुए कि वे शासकीय दल से जब्ती का सामान तक छीन ले गए? माफिया पर नकेल कसने में पुलिस का सख्त रुख, अब बुलडोजर कार्रवाई का इंतजार मामले की गंभीरता को देखते हुए सोहागपुर पुलिस ने नामजद आरोपियों सहित अन्य सह-आरोपियों पर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर तलाश तेज कर दी है। पुलिस की इस निष्पक्ष और त्वरित एफआईआर की आम जनता सराहना कर रही है। अब देखना यह होगा कि शासन और प्रशासन के दावों के बीच, बार-बार कानून को ठेंगा दिखाने वाले इन बेखौफ आरोपियों पर खाद्य विभाग और पुलिस प्रशासन किस तरह का कड़ा शिकंजा कसता है, या फिर यह मामला भी महज कागजी कार्यवाहियों तक सीमित रह जाएगा।
