21 से कलम बंद हड़ताल की चेतावनी सहागपुर,ब्योहारी, जयसिंहनगर, गोहपारू और बुढ़ार में वेतन कटौती व निलंबन से आक्रोश, जनप्रतिनिधियों की चुप्पी और प्रशासनिक ढर्रे पर उठे सवाल
Junaid Khan - शहडोल। प्रशासनिक तानाशाही से आक्रोशित पटवारी, गोहपारू तहसीलदार को हटाने की मांग मध्य प्रदेश पटवारी संघ जिला शहडोल के बैनर तले जिले भर के पटवारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों की दमनकारी नीतियों और एकतरफा रवैये के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। सोहागपुर, ब्योहारी, जयसिंहनगर, गोहपारू और बुढ़ार तहसीलों में बिना किसी प्राकृतिक न्याय या सुनवाई के पटवारियों पर निलंबन और अवैतनिक वेतन कटौती जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाइयां की जा रही हैं, जिससे राजस्व अमले में गहरा आक्रोश व्यापत है। विशेष रूप से गोहपारू तहसीलदार के रवैये को लेकर पटवारियों में भारी असंतोष है, जिन पर ज्ञापन लेने से इनकार करने, तानाशाही रवैया अपनाने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान छोटी-छोटी बातों पर मानसिक प्रताड़ना देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पटवारी संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर गोहपारू तहसीलदार को तत्काल हटाने की मांग की है। संघ ने स्पष्ट किया है कि खराब मौसम और भारी बारिश जैसी विषम परिस्थितियों के बावजूद पटवारी निष्ठापूर्वक शासकीय कार्यों का संपादन कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों का यह दमनकारी रुख अब बर्दाश्त से बाहर हो चुका है। जनप्रतिनिधियों की खामोशी पर सवाल, 21 से ठप रहेगा राजस्व कार्य एक तरफ जहां राज्य सरकार और स्थानीय विधायक-सांसद क्षेत्र में सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और पारदर्शी व्यवस्था का दावा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर अधिकारियों की इस हठधर्मिता और तानाशाही पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े करती है। शासन-प्रशासन की व्यवस्था में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले पटवारियों के उत्पीड़न पर स्थानीय मंत्रियों, सांसदों और विधायकों द्वारा समय रहते हस्तक्षेप न करना शासन की मंशा पर भी सवालिया निशान लगाता है। पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 19 और 20 सितंबर के शासकीय अवकाश के दौरान उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और काटा गया वेतन बहाल कर मनमाने निलंबन निरस्त नहीं किए गए, तो 21 सितंबर 2026 से पूरे जिले के पटवारी अनिश्चितकालीन 'कलम बंद हड़ताल' पर चले जाएंगे। जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो, अगस्त माह का वेतन जारी करने की मांग पटवारियों के इस प्रस्तावित आंदोलन से नामांतरण, सीमांकन, जाति-निवास प्रमाण पत्र और किसान सम्मान निधि जैसे अति-आवश्यक जनहित के कार्य पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गए हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी। संघ की स्पष्ट मांग है कि अगस्त 2026 का पूरा वेतन अविलंब जारी किया जाए, बिना कारण काटे गए वेतन को वापस किया जाए और दुर्भावनापूर्ण तरीके से निलंबित किए गए पटवारियों को सहसम्मान बहाल किया जाए। यदि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने समय रहते इस मामले में मध्यस्थता कर गोहपारू तहसीलदार सहित अन्य हठधर्मी अफसरों पर अनुशासनात्मक लगाम नहीं कसी, तो यह प्रशासनिक टकराव पूरे जिले की व्यवस्था को ध्वस्त कर देगा।
