बदलते मौसम के बीच जिला अस्पताल बना सहारा,22 हजार से अधिक मरीजों को मिला बेहतर इलाज

प्रशासन,स्वास्थ्य विभाग और कर्मठ डॉक्टरों की सजगता से संभली स्थिति,विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने के लिए जनता का भी सराहनीय योगदान 


Junaid Khan - शहडोल। अगस्त माह के दौरान मौसम के तीखे तेवरों, उमस, तेज धूप और झमाझम बारिश के मिश्रित असर के कारण अंचल में मौसमी बीमारियों का प्रकोप चरम पर रहा। इसके बावजूद जिला प्रशासन, प्रदेश सरकार की संवेदनशील नीतियों और स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी के चलते लाखों नागरिकों को समय पर राहत मिल सकी। जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, इस विषम मौसम के बीच अकेले अगस्त माह में 22 हजार से भी अधिक मरीजों ने ओपीडी में पहुंचकर स्वास्थ्य लाभ लिया। प्रतिदिन औसतन 900 से अधिक मरीज अस्पताल पहुंचे, जिनमें लगभग 40 प्रतिशत लोग वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम और खांसी जैसी समस्याओं से पीड़ित रहे। एक ओर जहां मौसम की मार से ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोग अस्वस्थ हुए, वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ ने दिन-रात एक करके सभी को सुचारू उपचार उपलब्ध कराया। बदलते मौसम में बच्चों, बुजुर्गों और ग्रामीणों में नमी व संक्रामक बीमारियों का असर अधिक देखा गया, जिससे मेडिसिन वार्ड में मरीजों का दबाव काफी बढ़ गया। स्थिति यह रही कि अस्पताल में बेड की उपलब्धता सीमित होने के बावजूद स्वास्थ्य अमले ने किसी भी मरीज को बिना इलाज वापस नहीं लौटने दिया। बरामदों से लेकर अतिरिक्त व्यवस्थाएं बनाकर हर पीड़ित तक चिकित्सकीय देखभाल पहुंचाई गई। इस पूरी व्यवस्था को दुरुस्त रखने में जिला प्रशासन की निगरानी, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का मार्गदर्शन और स्वास्थ्य विभाग का दूरदर्शी प्रबंधन अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध हुआ। विपरीत परिस्थितियों में घंटों कतार में खड़े रहकर संयम और धैर्य का परिचय देने वाली आम जनता भी बधाई की पात्र है, जिन्होंने स्वास्थ्य तंत्र पर भरोसा बनाए रखा और व्यवस्था संचालन में सहयोग प्रदान किया। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों एवं सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ तथा चिकित्सक डा. गंगेश तांडिया ने बताया कि अगस्त माह में मौसम परिवर्तन के चलते वायरल फीवर और सांस संबंधी तकलीफें तेजी से बढ़ी हैं। डॉक्टरों ने आमजन से अपील की है कि शुरुआती लक्षणों पर लापरवाही न बरतें, क्योंकि अनदेखी करने पर यह निमोनिया या गंभीर रूप ले सकता है। बारिश में भीगने से बचें, उबला हुआ पानी पीएं, बासी भोजन का त्याग करें और भीड़भाड़ में मास्क का प्रयोग करें। बिना चिकित्सकीय परामर्श के एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन से बचने की सलाह भी दी गई है। सरकारी तंत्र, कर्मठ डॉक्टरों और सजग नागरिकों के साझा प्रयासों का ही परिणाम है कि इतनी बड़ी संख्या में पहुंचे मरीजों का सफलता पूर्वक इलाज कर उन्हें राहत प्रदान की जा सकी।

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