माइंस क्षेत्र में पेड़ कटाई के दौरान दर्दनाक हादसा,मजदूर की मौत पर उठे गंभीर सवाल, प्रशासन ने तुरंत दी संबल योजना से आर्थिक राहत

सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर ठेकेदार और कंपनी के खिलाफ आक्रोश, कलेक्टर की त्वरित संवेदनशीलता से पीड़ित परिवार को मिली 4 लाख रुपये की मदद 


Junaid Khan - शहडोल। जिले के बुढ़ार थाना क्षेत्र अंतर्गत गोपालपुर बीट (आरएफ-828) में विक्रमपुर माइंस के लिए वन भूमि खाली कराने के दौरान एक अत्यंत दुखद घटना सामने आई है। कोल एरिया में ठेकेदार के माध्यम से कूप कटाई का काम चल रहा था, तभी एक विशालकाय पेड़ अनियंत्रित होकर काम कर रहे मजदूर केशव प्रसाद साहू (45 वर्ष), निवासी ग्राम शाहपुर के ऊपर गिर गया। सिर में गंभीर चोट आने के कारण मजदूर ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद कार्यस्थल पर हड़कंप और अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया। इस भीषण हादसे ने माइंस कंपनी, ठेकेदार और सुरक्षा प्रबंधन व्यवस्था पर कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और मजदूर संगठनों का आरोप है कि कूप कटाई के दौरान सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। क्या ठेकेदार द्वारा मजदूरों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण (हेलमेट, जैकेट आदि) उपलब्ध कराए गए थे? हवा के तेज झोंकों और खतरे की आशंका के बावजूद काम जारी रखना सीधे तौर पर लापरवाही को दर्शाता है। पुलिस की ढुलमुल कार्यशैली को लेकर भी क्षेत्र में जन आक्रोश देखने को मिल रहा है, जहाँ केवल मर्ग कायम कर खानापूर्ति करने की बात सामने आ रही है। प्रशासनिक संवेदनशीलता,कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने तुरंत स्वीकृत की 4 लाख रुपये की सहायता दूसरी ओर, इस दुखद घड़ी में शहडोल जिला प्रशासन और कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल की ओर से निभाई गई। संवेदनशील व त्वरित भूमिका की व्यापक सराहना हो रही है। पीड़ित परिवार के संकट को देखते हुए कलेक्टर ने मुख्यमंत्री संबल योजना के अंतर्गत बिना किसी विलंब के मृतक केशव प्रसाद के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि मंजूर की है। सरकार की इस जनहितैषी योजना और जिला प्रशासन के त्वरित निर्णय से बेसहारा हुए परिवार को बड़ा सहारा मिला है। आम जनता और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन ने अपनी ओर से संवेदनशीलता दिखाते हुए आर्थिक मदद तो तुरंत पहुंचा दी, जो बेहद प्रशंसनीय है, लेकिन अब ऐसे हादसों को रोकने के लिए जिम्मेदार एजेंसियों पर नकेल कसना भी उतना ही जरूरी है। कंपनी, ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग। इस पूरे घटनाक्रम में वन विभाग, माइंस कंपनी और ठेकेदार की भूमिका पर लगातार उंगलियां उठ रही हैं। यद्यपि यह कार्य बीट गार्ड और डिप्टी रेंजर की देखरेख में चलने का दावा किया जा रहा है, फिर भी इतने बड़े हादसे का होना सुरक्षा निगरानी की पोल खोलता है। पीड़ित परिवार और स्थानीय ग्रामीणों ने पुरजोर मांग की है कि केवल आर्थिक सहायता देना ही काफी नहीं है, बल्कि इस पूरे हादसे की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। विक्रमपुर माइंस से संबंधित जिम्मेदार कंपनी, ठेकेदार तथा लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि समय रहते सुरक्षा मानकों की समीक्षा नहीं की गई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

Previous Post Next Post