अधिकारियों के रवैये और बिना सुनवाई वेतन काटने की कार्रवाई पर फूटा रोष, जिलेभर में चरमराई व्यवस्था
Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश पटवारी संघ के बैनर तले जिलेभर के 350 पटवारियों ने प्रशासनिक तानाशाही और मनमाने रवैये के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोहागपुर तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठे पटवारियों की कलमबंद हड़ताल के चलते पूरे जिले की राजस्व प्रणाली ठप्प हो चुकी है। दिन-रात ग्राउंड स्तर पर शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन और जनता की सेवा में जी-तोड़ मेहनत करने वाले पटवारियों का आरोप है कि जिम्मेदार उच्च अधिकारी अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए उन पर एकतरफा दंडात्मक कार्रवाई कर रहे हैं। बिना किसी नैसर्गिक न्याय अथवा पक्ष रखने का अवसर दिए सीधे वेतन रोकने जैसी दमनकारी नीतियों से तंग आकर पटवारियों को आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा है। यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया और मांगों का निराकरण नहीं हुआ, तो यह हड़ताल और अधिक उग्र रूप धारण करेगी।
पटवारियों द्वारा जिला प्रशासन व कलेक्टर के नाम सौंपे गए ज्ञापन में जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। संघ द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार सोहागपुर में 17 पटवारियों का वेतन 25 अगस्त को बगैर किसी सुनवाई के एसडीएम द्वारा काट दिया गया। इसी प्रकार ब्योहारी तहसील में 13 पटवारियों का वेतन 31 अगस्त को, जयसिंहनगर में 6 पटवारियों का मई माह का वेतन और 9 पटवारियों का अगस्त माह का वेतन बिना किसी लिखित आदेश के रोक दिया गया। इसके अलावा गोहपारू क्षेत्र में 15 सितंबर से परेशान होकर पटवारी कलमबंद हड़ताल पर चले गए हैं, जबकि बुढ़ार में भी अगस्त माह में 4 पटवारियों का वेतन बिना कोई स्पष्टीकरण या सुनवाई का अवसर दिए रोक दिया गया। दिन-रात काम करने के बावजूद लगातार हो रही इस प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई से निचले स्तर के अधिकारियों व कर्मचारियों में भारी असंतोष व्यापत है। शासन-प्रशासन की रीढ़ माने जाने वाले पटवारी राजस्व वसूली, गिरदावरी, सीमांकन से लेकर आपदा राहत और विभिन्न शासकीय योजनाओं को धरातल पर उतारने में दिन-रात एक कर देते हैं। इसके बावजूद वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोगात्मक रुख अपनाने के बजाय दंडात्मक और तानाशाही रवैया अपनाना पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। पटवारियों का स्पष्ट कहना है कि समर्पण और पूरी निष्ठा से काम करने के बाद भी यदि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाएगा और एकतरफा कार्रवाई की जाएगी, तो वे काम करने में असमर्थ हैं। इस हड़ताल से नामांतरण, बंटवारा, आय-जाति प्रमाण पत्र और किसान कल्याण से जुड़े सभी महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह से ठप्प पड़ गए हैं, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी तानाशाही रवैया अपनाने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की है।
