आप पार्टी व प्रबुद्ध नागरिकों ने संभागायुक्त को सौंपा ज्ञापन; डेटा लीकेज और साइबर फ्रॉड पर अंकुश लगाने की पुरजोर मांग
Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश शासन द्वारा 'जनविश्वास अभियान', 'डिजिटल मध्य प्रदेश' और 'विकसित भारत 2047' के तहत भले ही डिजिटल गवर्नेंस और सुशासन के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हों, लेकिन धरातल पर शासकीय दफ्तरों में आज भी लालफीताशाही और कागजी फाइलों का पुराना मकड़जाल हावी है। दफ्तरों में रोजाना जमा हो रही पहचान पत्रों की हार्ड प्रतिया (फोटोकॉपी) से नागरिकों का अति-संवेदनशील निजी डेटा (Personal Identity Data) खुलेआम असुरक्षित घूम रहा है। इस ढर्रे के खिलाफ आम आदमी पार्टी (प्रदेश सचिव एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी शक्ति सिंह चंदेल) के नेतृत्व में प्रबुद्ध नागरिकों, विधि विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों ने एकजुट होकर हुंकार भरी है। प्रतिनिधिमंडल ने संभागायुक्त एवं जिला कलेक्टर शहडोल के नाम ज्ञापन सौंपकर शहडोल संभाग को 'पायलट प्रोजेक्ट' के रूप में शत-प्रतिशत 'पेपरलेस और सुरक्षित डिजिटल संभाग' घोषित करने की पुरजोर मांग की है। ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि शासन-प्रशासन ने अपनी कार्यशैली में तत्काल सुधार नहीं किया, तो डेटा चोरी और पर्यावरण क्षति की पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी। कागजी ढर्रे से साइबर फ्रॉड और डेटा चोरी का बढ़ा खतरा, आईटी एक्ट के उल्लंघन पर उठाए सवाल दिए गए ज्ञापन में बेहद गंभीर और व्यावहारिक पहलुओं को उजागर करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया गया है। विधि विशेषज्ञों और समाजसेवियों ने कहा कि शासकीय दफ्तरों, लोक सेवा केंद्रों और योजनाओं के आवेदनों के नाम पर नागरिकों से आधार कार्ड, समग्र आईडी, बैंक पासबुक जैसी संवेदनशील फाइलों की हार्ड कॉपी मांगना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act 2000) की धारा 43 और आधार अधिनियम के सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन है। कार्यालयों और चॉइस सेंटरों से इन्हीं कागजी दस्तावेजों के लीक होने के कारण अपराधी फर्जी सिम निकालकर अवैध बैंक निकासी (Cyber Fraud) और पहचान की चोरी (Identity Theft) जैसी गंभीर घटनाओं को बेझिझक अंजाम दे रहे हैं। ज्ञापन सौंपने वालों ने मांग की है कि 100% e&Office प्रणाली को मंत्रालय से लेकर तहसील व जनपद स्तर तक अनिवार्य किया जाए तथा डिजिलॉकर (DigiLocker) व ई-साइन (e&Sign) को ही कानूनी मान्यता दी जाए, ताकि डिजिटल सत्यापन से साइबर अपराधियों की कमर तोड़ी जा सके। करोड़ों का अपव्यय, कट रहे पेड़: शहडोल को 'पायलट प्रोजेक्ट' बनाकर 'ग्रीन ऑफिस' लागू करने की मांग
संभागीय मुख्यालय पर सौंपे गए इस मांग पत्र में पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता का मजबूत रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि हर साल शासकीय विभागों में फाइलों और ज्ञापनों के नाम पर लाखों टन कागजों की खपत होती है, जिससे न केवल जंगलों पर आरी चल रही है बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई का करोड़ों रुपया स्टेशनरी और प्रिंटिंग मद में बर्बाद हो रहा है। यदि प्रशासन 'ग्रीन-ऑफिस (Green Office) प्रोटोकॉल' लागू कर बैठकों व समीक्षाओं में प्रिंटेड बुकलेट्स के बजाय टैबलेट, स्क्रीन प्रेजेंटेशन और डिजिटल पीडीएफ (PDF) अपनाए, तो प्रतिवर्ष लाखों पेड़ों और अरबों लीटर पानी की बचत के साथ कार्बन फुटप्रिंट में बड़ी कमी आएगी। साथ ही राजस्व अदालतों (SDM, तहसीलदार) में समन-नोटिस की तामीली के लिए व्हाट्सएप, ई-मेल और डिजिटल पोर्टल अनिवार्य होने से फाइल ट्रैकिंग पारदर्शी होगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। ज्ञापन सौंपने वालों में शक्ति सिंह चंदेल, विकास सचदेव, राजेश शर्मा, डॉ. एस.के. त्रिपाठी, रोहित पांडे, विक्रम सिंह, मेहरून्निसा गुप्ता, अनूप शर्मा आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस दूरदर्शी मांग पर कब तक जगता है या यह फाइलों के ढेर में दबा रहेगा।
