सोहागपुर और जयसिंहनगर में लाखों की दुस्साहसिक वारदातें, एफआईआर में नुकसान घटाने के खेल पर भी उठे सवाल
Junaid Khan - शहडोल। जिले में अपराध और अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि आम जनता का अपने ही घरों में रहना दूभर हो गया है। दिन-दहाड़े और देर रात हो रही चोरी की श्रृंखलाबद्ध वारदातों ने पुलिस गश्त और मुस्तैदी के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। ताजा मामला सोहागपुर थाना क्षेत्र के ग्राम कोटमा का है, जहां हाई स्कूल के पास रहने वाले आजाद प्रजापति (25 वर्ष) के सूने मकान को अज्ञात चोरों ने अपना निशाना बनाया। बीते 31 अगस्त की दोपहर करीब 2:30 बजे जब पीड़ित परिवार काम से बाहर गया हुआ था, तभी बेखौफ चोरों ने मुख्य गेट और कमरों के ताले तोड़कर अलमारियों में रखे लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात और नकदी साफ कर दी। शाम 4:30 बजे जब पीड़ित की मां वापस लौटीं, तो घर का सारा सामान अस्त-व्यस्त पड़ा था। चोर अपने साथ 1 सोने का मंगलसूत्र, 1 जोड़ी सोने के कान के टाप्स, 1 जोड़ी सुई-धागा, 1 जोड़ी चांदी की पाजेब, 1 जोड़ी चांदी की पायल, 1 चांदी का करधन, चांदी की 7 चूड़ियां, 2 सोने के लॉकेट, 1 चांदी का ब्रेसलेट, 1 सोने की अंगूठी, 3 सोने की कील और रसीदों के साथ अन्य जेवर समेट ले गए। हैरान करने वाली बात यह है कि पीड़ित पक्ष के अनुसार लगभग 10 लाख रुपये का माल पार हुआ है, जबकि कागजों पर पुलिसिया खानापूर्ति करते हुए महज 1.51 लाख रुपये की चोरी दर्ज की गई, जो कहीं न कहीं मामले की लीपापोती और प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है। प्रशासन और पुलिस की सुस्ती का आलम सिर्फ सोहागपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि जयसिंहनगर थाना क्षेत्र के ग्राम सेमुरा में भी कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए ऐसी ही वारदात को अंजाम दिया गया। यहां विष्णु गुप्ता (33 वर्ष, पिता रामस्वरूप गुप्ता) के सूने मकान का ताला तोड़कर चोरों ने 30 अगस्त की रात 9 बजे से 31 अगस्त की सुबह 7 बजे के बीच सेंधमारी की। लगातार घट रही इन घटनाओं से साफ जाहिर होता है कि जिले में खाकी का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है और जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ लकीर पीटने तक सीमित हैं। क्षेत्रीय जनता अपने जीवनभर की गाढ़ी कमाई और सुरक्षा को लेकर बेहद डरी-सहमी है। जनहित में अब सवाल उठना लाजमी है कि आखिर कब तक पुलिस-प्रशासन अपनी नाकामी छुपाने के लिए औपचारिक शिकायतों का अमलीजामा पहनाता रहेगा और कब इन बेखौफ अपराधियों पर शिकंजा कसकर पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाया जाएगा? इसी बीच, जैतपुर थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली और सामाजिक स्थिति से जुड़ा एक और मामला सामने आया, जहां 20 अगस्त को 16 वर्षीय किशोर स्कूल जाने के बहाने बैग में कपड़े रखकर अकेले ही उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन करने निकल गया। जैतपुर बस स्टैंड से शहडोल और फिर नर्मदा एक्सप्रेस से उज्जैन पहुंचे इस बालक के लापता होने पर परिजनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे बाद में पुलिस ने बैतूल से दस्तयाब कर लिया। भले ही पुलिस ने किशोर को ढूंढ निकाला हो, लेकिन जिले में लगातार बढ़ती चोरी, अपराध और पुलिस की कार्यशैली पर उठते सवालों के बीच स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता से आम जनमानस में भारी रोष व्याप्त है।
