मरीज की मौत के बाद परिवार पर इलाज के खर्च का बोझ,जनहित में सरकार बनाए स्पष्ट नीति
Junaid Khan - शहडोल। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज की इलाज के दौरान मौत हो जाने के बाद उसके परिवार के सामने अक्सर दोहरी मुश्किल खड़ी हो जाती है। एक ओर परिवार अपने सदस्य को खोने के सदमे से गुजरता है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल के इलाज का बकाया बिल चुकाने का आर्थिक दबाव भी सामने आ जाता है। ऐसे मामलों को देखते हुए अब जनहित में ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है, जिसमें मरीज की मृत्यु होने की स्थिति में उसके परिजनों को अस्पताल के भारी-भरकम बिल से राहत मिल सके। गंभीर बीमारी के उपचार में कई बार परिवार की जमा पूंजी समाप्त हो जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवार मरीज को बचाने की उम्मीद में कर्ज लेकर अथवा अपनी संपत्ति गिरवी रखकर उपचार कराते हैं। इसके बावजूद यदि मरीज की जान नहीं बच पाती, तो परिवार के सामने इलाज के खर्च का भुगतान करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है।
मरीज की जान बचाने की कोशिश के साथ मानवीय पहलू भी जरूरी
ऐसी परिस्थितियों में स्वास्थ्य व्यवस्था के मानवीय पक्ष पर भी चर्चा जरूरी है। अस्पतालों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का प्राथमिक उद्देश्य मरीज का उपचार कर उसकी जान बचाना होता है। लेकिन उपचार के बावजूद मरीज की मृत्यु होने पर परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा राहत की कोई प्रभावी व्यवस्था किए जाने पर विचार किया जा सकता है।
गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को मिल सकती है राहत
कई परिवार इलाज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं होने के बावजूद अपने परिजन के उपचार के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। ऐसे में मरीज की मृत्यु के बाद अस्पताल का पूरा बिल चुकाने की बाध्यता परिवार को लंबे समय तक आर्थिक संकट में डाल सकती है। सरकार यदि इस दिशा में कोई नीति बनाती है तो उसके दायरे, पात्रता और प्रक्रिया को स्पष्ट किया जा सकता है, ताकि वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को राहत मिल सके। सरकार और स्वास्थ्य विभाग करें मंथन। इस मुद्दे पर सरकार, स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा विशेषज्ञों और निजी अस्पताल संचालकों के बीच चर्चा कर व्यावहारिक व्यवस्था तैयार की जा सकती है। इसमें यह भी तय किया जा सकता है कि किन परिस्थितियों में परिवार को बिल में छूट, आंशिक राहत या आर्थिक सहायता दी जाए। इससे मरीज के उपचार और अस्पतालों की व्यवस्थाओं के साथ-साथ पीड़ित परिवार के हितों का भी संतुलन बनाया जा सकेगा। मरीज की मृत्यु किसी भी परिवार के लिए बेहद कठिन परिस्थिति होती है। ऐसे समय में यदि परिवार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ जाए तो परेशानी और गंभीर हो जाती है। जनहित से जुड़े इस विषय पर सरकार को गंभीरता से विचार कर ऐसी नीति बनाने की दिशा में पहल करनी चाहिए, जिससे जरूरतमंद परिवारों को इलाज के बाद आर्थिक संकट से राहत मिल सके।
