एसपी चौपाल तक पहुंचा बेखौफ बदमाशों की गुंडागर्दी का मामला,पुलिसिया लीपापोती के खिलाफ अब एसपी से गुहार

कोतवाली पुलिस के लचर रवैये से असंतुष्ट पीड़ित ने खोला मोर्चा, निष्पक्ष जांच के साथ जानलेवा हमला व लूट की गैर-जमानती धाराएं लगाने की मांग,सभी 10 नामजद गुंडों की जल्द गिरफ्तारी का अल्टीमेटम


Junaid Khan - शहडोल। जिले में बेखौफ बदमाशों के हौसले किस कदर बुलंद हैं और स्थानीय कोतवाली पुलिस अपराधियों पर कितनी मेहरबान है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण गणेश मंदिर के पास घटित जानलेवा हमले और लूटपाट के मामले में देखने को मिल रहा है। थाना कोतवाली पुलिस द्वारा मामूली धाराओं में खानापूर्ति कर मामले को ठंडा करने की कोशिश के बाद अब पीड़ित पक्ष ने सीधे पुलिस अधीक्षक (एसपी) शहडोल की चौखट पर दस्तक दी है। पीड़ित राजनारायण बर्मन ने अपने भाई सिद्धार्थ बर्मन के साथ एसपी कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत पत्र सौंपते हुए पूरी घटना की सच्चाई उजागर की है और मांग की है कि आरोपियों पर लूट, हत्या के प्रयास (धारा 307) जैसी कड़ी और गैर-जमानती धाराएं जोड़ी जाएं।

घात लगाकर किया गया था प्राणघातक हमला, नामजद शिकायत में 10 आरोपियों के नाम

एसपी को सौंपे गए शिकायती पत्र में पीड़ित ने स्पष्ट किया है कि 26 सितंबर की रात जब वह और उसका छोटा भाई अपनी 'लवलाक फास्ट फूड' दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी रामबाबू कॉलोनी की गली में पूर्व नियोजित साजिश के तहत घात लगाए बैठे अपराधियों ने उन्हें घेर लिया। शिकायत पत्र के अनुसार, आयुष रिछारिया ने चलती गाड़ी में सिर पर बैट से जानलेवा वार किया, जिससे पीड़ित लहूलुहान होकर गिर पड़ा। इसके बाद अंशुल रिछारिया और आयुष सोनी ने बेसबॉल से पैरों पर वार किए, जबकि मोनू विश्वकर्मा बेल्ट से पीटता रहा। मौके पर मौजूद किस्सू वर्मन, आयुष सोनी, प्रियंक जेठानी, राजेश वर्मन, पलाश जेठानी और चिराग जेठानी ने भी लात-घूंसों से बेरहमी से मारपीट की। जब छोटा भाई सिद्धार्थ बचाने दौड़ा तो आरोपियों ने उसके बाल पकड़कर घसीटा और जान से मारने की धमकी दी।

दिनभर की कमाई के 4,660 रुपये लूटे,मोबाइल भी किया चकनाचूर 

इस वारदात में न केवल फरियादी की जान लेने की कोशिश की गई, बल्कि आरोपियों ने सरेराह लूटपाट को भी अंजाम दिया। पीड़ित ने शिकायत में बताया कि घटना के दौरान उसकी शर्ट की जेब में रखे दुकान की दिनभर की बिक्री के कुल 4,660 रुपये आरोपी लूटकर चंपत हो गए। इतना ही नहीं, मारपीट के दौरान उसकी पैंट की जेब में रखा मोबाइल फोन भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। जब सिद्धार्थ ने 112 डायल कर पुलिस को सूचना दी, तब कहीं जाकर आरोपी मौके से भाग खड़े हुए।

कोतवाली पुलिस की ढिलाई और अस्पताल प्रशासन का संदेहास्पद रवैया

मामले में सबसे बड़ा सवाल स्थानीय पुलिस और जिला अस्पताल के रवैये पर खड़ा हो रहा है। पीड़ित परिजनों का कहना है कि जब वे घटना के बाद थाने पहुंचे तो पुलिस का रवैया निष्पक्ष जांच का न होकर आरोपियों को बचाने जैसा प्रतीत हो रहा था। पुलिस ने उनके द्वारा बताई गई सही कहानी और आरोपियों के पूरे नामों को नजरअंदाज करते हुए बेहद हल्की धाराओं में मामला दर्ज किया। दूसरी ओर, गंभीर चोटों और सिर में कई टांके आने के बावजूद जिला अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा सीटी स्कैन कराने से साफ मना करना और मरीज को छुट्टी देने की जल्दबाजी दिखाना, इस पूरी प्रक्रिया पर गहरे संदेह पैदा करता है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो राजनीतिक रसूख और आर्थिक प्रभाव के दम पर मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस केस दोनों को कमजोर करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।

कड़ी कार्रवाई और तत्काल गिरफ्तारी की मांग

एसपी कार्यालय में दी गई शिकायत के माध्यम से पीड़ित परिवार ने प्रशासन के सामने 04 प्रमुख मांगें रखी हैं। 1.घटना में शामिल सभी 10 नामजद आरोपियों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए। 2.मामले में संगीन अपराध के तहत सख्त व गैर-जमानती धाराएं (लूट व हत्या का प्रयास) लागू की जाएं। 3.दुकान पर आकर हंगामा करने वाले व साजिश में शामिल अज्ञात लड़कों पर भी मामला दर्ज हो। 4.पीड़ित का सही और उचित मेडिकल परीक्षण कराकर निष्पक्ष न्याय दिलाया जाए। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला पुलिस अधीक्षक इस पूरे मामले में कोतवाली पुलिस की लापरवाही और गुंडों के दुस्साहस पर क्या कड़ा कदम उठाते हैं, या फिर रसूखदार अपराधियों के आगे कानून यूं ही बेबस नजर आएगा।

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