किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ भड़का जनाक्रोश, भारतीय किसान संघ ने खोला मोर्चा

प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम सौंपा 36 सूत्रीय ज्ञापन प्रशासनिक तानाशाही और बैंकों के अड़ियल रवैये पर बरसे किसान,पटवारी संघ के मैदानी कार्यों की हुई सराहना,मांगों पर त्वरित कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन की दी चेतावनी 


Junaid Khan - शहडोल। केंद्र व राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों, खाद की कृत्रिम किल्लत, बैंकों की अड़ियल कार्यप्रणाली और सिंचाई-बिजली व्यवस्था में व्याप्त भर्राशाही के खिलाफ भारतीय किसान संघ ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को संगठन के बैनर तले एकजुट हुए सैकड़ों किसानों ने प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम 36 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा रहा। किसान नेताओं ने खरीफ फसलों के नुकसान की भरपाई, कृषि यंत्रों पर से पूर्णतः जीएसटी समाप्त करने, लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य (MSP) देने और अमानक बीज-खाद विक्रेताओं पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग उठाई है।  

किसान संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि एक तरफ जहां सरकार बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं जमीनी स्तर पर बैंक और प्रशासनिक अधिकारी पात्र किसानों को लोन, केसीसी और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रख कर परेशान कर रहे हैं। बिजली विभाग की मनमानी, अघोषित कटौती और ट्रांसफार्मर बदलने में की जा रही देरी ने अन्नदाता को आर्थिक संकट में धकेल दिया है। वहीं दूसरी ओर, किसान नेताओं ने राजस्व मामलों में पटवारी संघ के मैदानी अमले द्वारा सीमित संसाधनों के बावजूद किए जा रहे जनहितैषी कार्यों की सराहना की। संघ ने मांग की कि पटवारियों पर बढ़ते कार्यबोझ को देखते हुए नामांतरण, फौती और नक्शा दुरुस्ती की प्रक्रियाओं को और सरल बनाया जाए ताकि आम जनता को भटकना न पड़े। ज्ञापन सौंपने के दौरान भारतीय किसान संघ के संभागीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व कृषि वैज्ञानिक भानु प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष धनंजय सिंह पचगांव (प्रिंस), जिला मंत्री सुशील द्विवेदी, सोहागपुर तहसील अध्यक्ष विजय गुप्ता, ब्यौहारी तहसील अध्यक्ष दरबारीलाल राठौर और राजेंद्र द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा किसान हितैषी फैसले नहीं लिए गए और ज्ञापन में उल्लेखित मांगों का पारदर्शी निराकरण नहीं हुआ, तो संघ सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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