संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में श्री कृष्ण पर्व का आयोजन सम्पन्न

पौराणिक लोक परंपराओं एवं जनश्रुतियों से आमजन को अवगत कराने का प्रयास सराहनीय- विधायक मनीषा सिंह 


Junaid Khan - शहडोल। 05 सितंबर 2026 संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में श्री कृष्ण पर्व का आयोजन उत्साह एवं उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। आयोजन के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी पौराणिक लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत एवं जनश्रुतियों से आमजन को अवगत कराया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक श्रीमती मनीषा सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देश और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पौराणिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास किया जा रहा है। ऐसे आयोजन हमारी लोक परंपराओं एवं संस्कृति से आमजन को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी गौरवशाली विरासत को सहेजते हुए विरासत से विकास की ओर निरंतर आगे बढ़ रहा है। श्री कृष्ण पर्व के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी शिक्षाओं तथा भारतीय लोक संस्कृति में उनके महत्व से उपस्थित जनसमुदाय को परिचित कराया गया। आयोजन में सांस्कृतिक एवं पारंपरिक रंग देखने को मिला। कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष सोहागपुर श्रीमती हीरावती कोल, जिला योजना समिति की सदस्य श्रीमती अमिता छपरा, अपर कलेक्टर श्री संरोधन सिंह, एसडीएम श्रीमती अमृता गर्ग, संयुक्त विकास आयुक्त श्री एम.पी. सिंह, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्री आनंद सिन्हा, जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री विवेक पाण्डेय, व्यापारी संघ के अध्यक्ष श्री लक्ष्मण गुप्ता सहित सीईओ जनपद पंचायत ममता मिश्रा, गणमान्य नागरिक, शासकीय सेवक, पत्रकार, आमजन एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। श्रीकृष्ण पाथेय नया, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन कृ शहडोल के सहयोग से श्रीकृष्ण की लोक-स्मृतियों, भक्ति और सांस्कृतिक विविधता को समर्पित श्श्रीकृष्ण पर्वश् का आयोजन जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जनपद सभागार, शहडोल में शुक्रवार को किया गया। लोकगायन, कथक और भक्ति संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियों ने वातावरण को कृष्णमय कर दिया। विंध्य की लोकपरंपरा से लेकर शास्त्रीय नृत्य और भक्ति संगीत तक, कलाकारों ने श्रीकृष्ण के विविध रूपों को अपनी कला के माध्यम से जीवंत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ रीवा की सुप्रसिद्ध बघेली लोक गायिका सुश्री मणिमाला सिंह एवं साथियों की लोक गायन प्रस्तुति से हुआ। प्रस्तुति गणेश वंदना ‘पार्वती के पुत्र गजानन झूल रहे पलना’ से आरंभ हुई। लोकधुनों की इस यात्रा में बघेली लोकजीवन की सहज मिठास और भक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला। सोहर ‘भादो रैन भयावन अति डेरवान’, बधाई ‘बाजी बाजी रे बधाइयां’, ‘बृज मां बजत बधाई हो’, कजरी ‘हरे राम बने कन्हैया’, हिंडोली ‘चारों खूटे के बने रे’, झूला ‘मोहन छोड़ दे रे कलाइयां’, दादरा ‘श्याम छेड़ ना हमका’ एवं ‘गोकुल में बजत बधाई हो’ और ‘बाजी बाजी बधाइयां यशोदा अंगना’ जैसी प्रस्तुतियों ने लोकसंस्कृति के रंग बिखेरे। गायन में बघेली अंचल की मिट्टी की सुगंध, लोकभावनाओं की आत्मीयता और कृष्ण के प्रति सहज अनुराग मुखर हुआ। इसके पश्चात कथक नृत्यांगना डॉ. शांभवी शुक्ला मिश्रा एवं साथी, दिल्ली ने ‘कृष्ण-सुदामा मैत्री प्रसंग’ को कथक के भाव, नृत्य और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया। गणेश वंदना से प्रारंभ हुई प्रस्तुति में जयपुर घराने की चुनिंदा बंदिशों को ताल धमार में प्रस्तुत किया गया। नृत्य की लयकारी, भावाभिनय और कथात्मकता के सुंदर समन्वय ने कृष्ण-सुदामा की निष्कलुष मित्रता को मंच पर साकार कर दिया। प्रस्तुति में कृष्ण की भूमिका डॉ. शांभवी शुक्ला मिश्रा, सुदामा की भूमिका सुश्री अदिति भारद्वाज, कालिया नाग एवं रानी रुक्मणी की भूमिका सुश्री वंदिता एवं सूत्रधार, संत्री और शाखा की भूमिकाओं में श्री कुमार ऋषभ शुक्ला ने अभिनय किया। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति पद्मश्री अनूप जलोटा के शिष्य श्री प्रभंजय चतुर्वेदी एवं साथी, भिलाई ने भक्ति संगीत के सुरों से सजाई। श्अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरमश्, ‘जग में सुंदर है दो नाम’, ‘जीवन में श्याम चाहिए’, ‘प्रभु जी तुम चंदन हम पानी’, ‘मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है’, ‘छोटी-छोटी गईया छोटे छोटे ग्वाल’, ‘राधे राधे जपो चले आएंगे बिहारी’ एवं ‘मुकुंद माधव गोविंद बोल, केशव माधव हरि हरि बोल’ जैसे भजनों ने वातावरण को भक्ति और माधुर्य से भर दिया। भक्ति संगीत की इस प्रस्तुति में श्री भालचंद्र शेगेकर ने तबले पर, श्री दिलीप शर्मा ने की-बोर्ड पर, श्री सतीश सिन्हा ने बांसुरी पर और श्री देवव्रत मजूमदार ने ऑक्टोपैड पर प्रभावी संगत दी। 

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