जर्जर भवन में रह रहे आदिवासी छात्र,हादसे का इंतजार तो नहीं कर रहा प्रशासन?
Junaid Khan - शहडोल। दिल्ली में छात्रावास की इमारत गिरने से कई बच्चों की मौत की दर्दनाक घटना ने देशभर में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे के बाद अब शहडोल संभाग के महाराजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह महाविद्यालयीन आदिवासी बालक छात्रावास की जर्जर हालत भी चिंता का विषय बनती नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि छात्रावास भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है और यहां बड़ी संख्या में आदिवासी विद्यार्थी रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि भवन जर्जर है, तो यहां रहने वाले छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? दिल्ली की घटना ने यह संदेश दिया है कि जर्जर भवनों की समय रहते जांच और मरम्मत नहीं की गई तो लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। तत्काल हो स्ट्रक्चरल ऑडिट। शहडोल के इस आदिवासी छात्रावास का तत्काल तकनीकी निरीक्षण और स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाना चाहिए। भवन की छत, दीवारों, बीम और कॉलम की विशेषज्ञों से जांच कराई जाए। यदि भवन असुरक्षित पाया जाता है तो छात्रों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। प्रशासन को किसी हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवश्यक कदम उठाने चाहिए। बड़ा सवाल क्या हादसे के बाद जागेगा प्रशासन? क्या छात्रावास भवन की तकनीकी जांच कराई गई है? क्या भवन को सुरक्षित घोषित करने की रिपोर्ट प्रशासन के पास मौजूद है? यदि भवन जर्जर है तो इसकी मरम्मत या नए भवन की व्यवस्था कब होगी? इन सवालों पर प्रशासन को तत्काल जवाब देना चाहिए। युवा कांग्रेस सचिव शेख आबिद ने प्रशासन से मांग की है कि छात्रावास की स्थिति का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और आदिवासी छात्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि समय रहते सावधानी बरती जाए।
