बिजली विभाग में उपेक्षा से गहराया आक्रोश,11 सूत्री मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी मोर्चा

इंजीनियरों का हल्लाबोल: कनिष्ठ-सहायक यंत्रियों ने सौंपा ज्ञापन, 25 अक्टूबर को भोपाल में होगी महापंचायत


Junaid Khan - शहडोल। भोपाल मध्य प्रदेश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति और राजस्व वसूली की रीढ़ माने जाने वाले कनिष्ठ एवं सहायक यंत्रियों (जूनियर इंजीनियरों) के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। मध्य प्रदेश विद्युत मंडल पत्रोपाधि अभियंता संघ के आह्वान पर 15 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों और पावर प्लांट परिसरों में अधिकारियों-कर्मचारियों ने ऊर्जा सचिव के नाम जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपकर उग्र आंदोलन की बिगुल बजा दी है। बिजली कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन और शासन की अकर्मण्यता से नाराज अभियंताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि वर्षों से लंबित उनकी 11 सूत्री मांगों का अविलंब निराकरण नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में समूचे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था ठप हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

प्रशासनिक अनदेखी और शोषण पर फूटा गुस्सा

पत्रोपाधि अभियंता संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि बिजली कंपनियों में दिन-रात जोखिम भरे माहौल में काम करने वाले तकनीकी अधिकारियों के हक पर डाका डाला जा रहा है। वर्ष 2016 से 2025 के बीच 30 से 35 साल की सेवा देने के बावजूद कनिष्ठ यंत्रियों को एक भी पदोन्नति नहीं मिली। कई अभियंता प्रभार (करंट चार्ज) में ही सेवानिवृत्त होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। इसके अलावा, वर्ष 2018 के बाद नियुक्त यंत्रियों का वेतनमान और ग्रेड-पे समान नहीं किया जाना, न्यायालय के आदेशों के बावजूद लागू न करना शासन की मनमानी को दर्शाता है। बिजली हादसों पर बिना किसी तकनीकी जांच के अभियंताओं के खिलाफ धारा 304-A के तहत एफआईआर दर्ज करने और एकतरफा शो-कॉज नोटिस थमाने की दंडात्मक प्रवृत्ति से अधिकारी बेहद भयभीत और आक्रोशित हैं।

03 चरणों में ध्यानाकर्षण आंदोलन, 25 को भोपाल में महाजुटान

संघ द्वारा जारी रणनीति के अनुसार यह चरणबद्ध आंदोलन 3 प्रमुख चरणों में संचालित किया जा रहा है:

 1.पहला चरण (15 अक्टूबर 2026) प्रदेश के सभी सर्किल व पावर प्लांट स्तर पर जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री एवं ऊर्जा सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

2.दूसरा चरण (22 अक्टूबर 2026) इंदौर, भोपाल और जबलपुर स्थित सभी बिजली कंपनी मुख्यालयों में प्रबंध निदेशकों (MD) को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

3.तीसरा चरण (25 अक्टूबर 2026) निष्ठा परिसर, गोविंदपुरा (भोपाल) में प्रातः 11 बजे से संपूर्ण मध्य प्रदेश के कनिष्ठ व पदोन्नत सहायक यंत्रियों का ऐतिहासिक ध्यानाकर्षण महाजुटान होगा।

प्रमुख 11 सूत्री मांगें एक नजर में

 1.पदोन्नति में नियम शिथिलता: पदोन्नत सहायक यंत्रियों को नियमों में शिथिलता देकर जनवरी 2027 की डीपीसी में कार्यपालन यंत्री पद पर पदोन्नति दी जाए।

2.पृथक प्रोमोशनल चैनल: जूनियर इंजीनियर संवर्ग हेतु कार्यपालन व अधीक्षण यंत्री के 50% रिक्त पदों पर पदोन्नति के लिए सेपरेट गैलरी/चैनल बनाया जाए।

3.सीधी भर्ती पर रोक: सहायक यंत्री की नई भर्ती पर तत्काल रोक लगाकर शत-प्रतिशत पद कनिष्ठ यंत्रियों की पदोन्नति से भरे जाएं।

4.कंडिका 11 का विलोपन: चतुर्थ उच्च वेतनमान की पात्रता हेतु बाधक कंडिका 11 को समाप्त कर सेवाकाल की गणना प्रथम नियुक्ति से की जाए।

5.समान वेतनमान:वर्ष 2018 के पश्चात नियुक्त कनिष्ठ यंत्रियों का वेतनमान व ग्रेड-पे समान किया जाए।

6.संविदा संवर्ग में सुधार: सहायक यंत्री संविदा को कनिष्ठ यंत्री के पद पर नियुक्ति दी जाए।

7.संविदा नियमितीकरण: सभी कनिष्ठ यंत्री (संविदा) को तत्काल नियमित कर संविदा अवधि को सेवाकाल में गिना जाए।

8.शत-प्रतिशत पदोन्नति: आगामी डीपीसी में सहायक यंत्री के सभी रिक्त पदों को कनिष्ठ अभियंताओं की पदोन्नति से भरा जाए।

9.धारा 304-A से संरक्षण: बिजली दुर्घटनाओं में बिना तकनीकी जांच नामजद एफआईआर दर्ज न कर पदनाम के अनुसार ही नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

10.दंडात्मक कार्रवाई पर अंकुश:अनावश्यक शो-कॉज, चार्जशीट और दंडात्मक कार्रवाई से पूर्व प्रबंध निदेशक कार्यालय से पूर्व अनुमोदन अनिवार्य हो।

11.डिप्लोमाधारियों को अवसर:** विभागीय अनुमति से डिप्लोमा उत्तीर्ण लगभग 350 कर्मचारियों को कनिष्ठ यंत्री पद पर नियुक्ति प्रदान की जाए।

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