जलकर काउंटर पर रसीद कटवाने पहुंचे बुजुर्ग से बदसलूकी,सीएमओ चेंबर में ताला तो थाने पहुंचे पीड़ित,नपा प्रशासन मौन
Junaid Khan - शहडोल। जनता के खून-पसीने की कमाई और टैक्स के पैसों से हर महीने वेतन उठाने वाले नगर पालिका शहडोल के कर्मचारियों का रवैया अब जनसेवक जैसा कम और 'सड़क छाप दबंगों' जैसा ज्यादा नजर आने लगा है। संभागीय मुख्यालय की इस जिम्मेदार नागरिक संस्था में आए दिन आम जनता की समस्याओं का समाधान करना तो दूर, अब सीधे हाथापाई, थप्पड़बाजी और अभद्रता का खुला खेल शुरू हो गया है। ताजा और सनसनीखेज मामला बीते दिन 13 अक्टूबर 2026 का है, जब पुरानी बस्ती शहडोल के निवासी तेजबली मौर्य पिता जियालाल मौर्य अपनी निष्ठा का परिचय देते हुए नगर पालिका दफ्तर में जलकर (वॉटर टैक्स) की राशि जमा करने और रसीद कटवाने पहुंचे थे। लेकिन जलकर काउंटर पर तैनात कर्मचारी हरिप्रताप सिंह का रवैया जनता की सेवा करने के बजाय अमानवीयता से भरा था। जैसे ही करदाता उपभोक्ता ने नियमानुसार रसीद काटने का आग्रह किया, कथित कर्मचारी अपना आपा खो बैठा और उसने पीड़ित बुजुर्ग नागरिक पर ताबड़तोड़ तीन-चार थप्पड़ जड़ दिए। नगर पालिका दफ्तर में हुई इस गुंडागर्दी के दौरान वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों ने किसी तरह बीच-बचाव कर मामला शांत कराने की कोशिश की, लेकिन इस अप्रत्याशित बर्बरता का शिकार हुआ निरीह नागरिक रोता-बिलखता सीधे मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के चेंबर की ओर भागा। दुर्भाग्य से, न्याय की आस में पहुंचे पीड़ित को 'साहब' का चेंबर खाली और अफसर नदारद मिले। आखिरकार, इस दमनकारी रवैये और गुंडागर्दी के खिलाफ इंसाफ पाने के लिए पीड़ित को थाना कोतवाली का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ा। नगर पालिका में पदस्थ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और कनिष्ठ स्टाफ की दबंगई का आलम यह हो चुका है कि वे आम नागरिकों से सीधे मुंह बात करना भी अपनी शान के खिलाफ समझते हैं। दफ्तर में अपनी समस्याओं और कर भुगतान के लिए आने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और असहाय करदाताओं के साथ अभद्रता करना अब यहां की रोजमर्रा की आदत बन चुकी है। इस पूरी घटना ने प्रदेश सरकार के सुशासन और पारदर्शी प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। सबसे गंभीर और विचारणीय पहलू यह है कि यदि कोई मजबूर नागरिक कर्मचारियों की इस तानाशाही और बदसलूकी के खिलाफ पलटकर आवाज उठा दे, तो पूरा नगर पालिका प्रशासन और आला अफसर एकजुट होकर उस आम नागरिक पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने में एक मिनट की देरी नहीं करते। परंतु जब यही बेलगाम कर्मचारी सरकारी दफ्तर परिसर में खुलेआम जनता पर हाथ छोड़ रहे हैं और कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं, तब नगर पालिका प्रशासन मौन साधकर 'धृतराष्ट्र' की भूमिका में दुबक जाता है। पूर्व में भी नागरिकों द्वारा इस प्रकार के अभद्र व्यवहार की कई मौखिक और लिखित शिकायतें की जा चुकी थीं, लेकिन आला अधिकारियों द्वारा कोई ठोस अनुशासनात्मक या दंडात्मक कार्रवाई न किए जाने का ही नतीजा है कि कर्मचारियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे अब खुलेआम मारपीट पर उतर आए हैं। पीड़ित तेजबली मौर्य ने सीएमओ को लिखित आवेदन सौंपकर आरोपी कर्मचारी हरिप्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और उस पर कड़ी दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन व जिम्मेदार अधिकारी इस गुंडागर्दी पर क्या एक्शन लेते हैं या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
