भुखमरी के कगार पर शहर के ‘स्वच्छता दूत’ 04 महीने से नहीं मिला वेतन,ठेकेदारी प्रथा के खेल में पिसे 40 सफाई कर्मी, हड़ताल से थमे शहर के पहिए

भुखमरी के कगार पर शहर के ‘स्वच्छता दूत’ 04 महीने से नहीं मिला वेतन,ठेकेदारी प्रथा के खेल में पिसे 40 सफाई कर्मी, हड़ताल से थमे शहर के पहिए


Junaid Khan - शहडोल। शहर को साफ-सुथरा रखकर आम जनता को बीमारियों से बचाने वाले 'स्वच्छता दूत' आज खुद अपनी बुनियादी जरूरतों और आर्थिक तंगी से लड़ रहे हैं। नगरपालिका के अंतर्गत कार्यरत ठेका सफाई कर्मचारियों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया और 4 महीने से लंबित वेतन भुगतान न होने के विरोध में उन्होंने काम बंद कर बेमियादी हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। गुरुवार सुबह से ही सफाई कर्मियों द्वारा काम ठप कर देने के कारण शहर के विभिन्न वार्डों में कचरे का उठाव पूरी तरह ठप्प रहा, जिससे जगह-जगह गंदगी के ढेर लगने शुरू हो गए हैं। अपनी पीड़ा और अधिकार मांगने जब लगभग 40 पीड़ित कर्मचारी सुबह 11 बजे नगरपालिका परिसर पहुंचे, तो प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया। कर्मचारियों का साफ कहना है कि त्योहारों के इस मौसम में चार-चार महीनों से मानदेय न मिलना सीधे तौर पर उनके परिवारों को भुखमरी की ओर धकेलने जैसा है। ठेकेदारी व्यवस्था का शोषण और ईपीएफ-वेतन में भारी कटौती का आरोप हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों ने ठेकेदार और स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों की सांठगांठ पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कर्मचारियों के अनुसार, पहले वे सीधे नगरपालिका के अधीन अपनी सेवाएं दे रहे थे, लेकिन जब से व्यवस्था को ठेके पर सौंपा गया है, तब से उनका शोषण चरम पर है। तय समझौते के मुताबिक प्रत्येक कर्मचारी का मासिक वेतन 12,000 रुपये निर्धारित है, लेकिन ठेकेदार द्वारा कभी 8,000 तो कभी महज 9,000 रुपये थमाकर इतिश्री कर ली जाती है। इतना ही नहीं, कर्मचारियों के वेतन से पीएफ (प्रोविडेंट फंड) का पैसा तो काटा जा रहा है, लेकिन उनके मोबाइल पर पीएफ जमा होने का कोई मैसेज तक नहीं आता, जिससे बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े की बू आ रही है। कर्मचारियों ने बताया कि वे ठेकेदार से लेकर नपा अधिकारियों के चक्कर काटकर थक चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन का झुनझुना थमा दिया जाता है। अधिकारियों की बेरुखी से आक्रोश, अनिश्चितकालीन आंदोलन की दी चेतावनी एक तरफ जहां प्रदेश सरकार स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे और अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर काम करने वाले इन कर्मचारियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। आगामी त्योहारों के सिर पर होने के बावजूद वेतन न मिलने से कर्मचारियों के सामने अपने बच्चों के भरण-पोषण और घर चलाने का गहरा संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित सफाई कर्मियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनके बकाया वेतन का पूर्ण भुगतान और ठेकेदार की तानाशाही पर नकेल नहीं कसी गई, तो वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे और आंदोलन को और उग्र करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे रहेंगे। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में पूरा शहर कचरे के ढेर में तब्दील हो सकता है, जिसकी पूरी जवाबदेही ठेकेदार और नगरपालिका प्रशासन की होगी।

प्रशासन का पक्ष:

स्वच्छता कर्मचारियों को बुलाकर उनसे बातचीत की गई है। वर्तमान में सीएमओ साहब बाहर हैं। सोमवार को उनके वापस आते ही कर्मचारियों की सीधी वार्ता कराई जाएगी और समस्या के सकारात्मक समाधान के पूरे प्रयास किए जाएंगे।

अनिल महोबिया, स्वच्छता निरीक्षक, जिला शहडोल

Previous Post Next Post