कलेक्टर और सीएमओ की अनदेखी पर उठे सवाल,19 दिनों तक चले अवैध निर्माण पर आखिर क्यों मेहरबान रहे जिम्मेदार?
Junaid Khan - शहडोल। नगर पालिका परिषद और जिला प्रशासन की घोर लापरवाही एवं कथित संरक्षण के चलते शहर में अवैध अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। ताजा और सबसे चौंकाने वाला मामला नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 01 स्थित प्राथमिक शाला कोनीटोला का सामने आया है, जहां भू-माफिया और रसूखदारों ने बेखौफ होकर शासकीय स्कूल परिसर की सुरक्षा बाउंड्रीवॉल को ध्वस्त कर दिया और उस पर पक्की दुकान का निर्माण करा लिया। ताज्जुब की बात यह है कि यह पूरा खेल महज 19 दिनों के भीतर अधिकारियों की नाक के नीचे होता रहा, लेकिन नगर पालिका के वार्ड दरोगा से लेकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) तक किसी भी जिम्मेदार ने इसे रोकने की जहमत नहीं उठाई। शहडोल से रीवा मार्ग पर स्थित उमरिया-मानपुर तिराहा का यह इलाका बेहद व्यस्त और प्रशासनिक दृष्टिकोण से अति संवेदनशील माना जाता है। इसी मुख्य मार्ग से रोजाना जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, नगर पालिका सीएमओ सहित जिले के आला प्रशासनिक अधिकारियों का काफिला गोहपारू, जयसिंहनगर व अन्य क्षेत्रों के भ्रमण के लिए गुजरता है। इसके बावजूद 19 दिनों तक लगातार चले इस अवैध निर्माण पर किसी भी वरिष्ठ अधिकारी की नजर न पड़ना या नजरअंदाज कर देना प्रशासनिक व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है। स्थानीय रहवासियों का तो स्पष्ट तौर पर आरोप है कि नगर पालिका के जिम्मेदार कर्मचारियों एवं अधिकारियों के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष संरक्षण के बिना इतना बड़ा अवैध निर्माण संभव ही नहीं है। बच्चों के भविष्य और शासकीय संपत्ति की सुरक्षा को ताक पर रखकर किए गए इस अतिक्रमण से क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। जनप्रतिनिधियों की खामोशी भी इस पूरे मामले में संदिग्ध प्रतीत हो रही है। अब देखना यह होगा कि जनहित और शासकीय संपत्ति के संरक्षण का दावा करने वाला जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में संबंधित दोषी अधिकारियों, वार्ड दरोगा एवं अवैध निर्माणकर्ता पर क्या कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
