फुटपाथ पर जिंदगी काटने वाली असहाय वृद्धा की अनूठी भक्ति,न सिर पर पक्की छत, न कमाई का साधन, फिर भी हर साल खुद के खर्च पर बैठाती हैं माता रानी

समाजसेवियों ने बढ़ाया मदद का हाथ प्रशासनिक उपेक्षा और सरकारी योजनाओं के दावों के बीच पुरानी नगर पालिका की तंग गली में दिखा आस्था का अनूठा दरबार,समाजसेवियों ने सामग्री व गरम कपड़े भेंट कर कराया भव्य कढ़ी-चावल का भंडारा



Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल संभागीय मुख्यालय में पुरानी नगर पालिका स्थित चौधरी एजेंसी के बगल वाली तंग गली इन दिनों पूरे अंचल में अगाध आस्था और कौतूहल का केंद्र बनी हुई है। यहां एक अत्यंत निर्धन और बेसहारा माता श्री (वृद्धा) द्वारा स्थापित 'वायरल छोटी माता' (वैष्णो देवी) का पंडाल नगरवासियों के आकर्षण और श्रद्धा का प्रमुख स्तंभ बन चुका है। कंक्रीट के मकानों और सरकारी दावों के शहर में, फुटपाथ पर दिन-रात गुजारने वाली इस असहाय महिला की अटूट भक्ति ने यह साबित कर दिया है कि ईश्वर की साधना के लिए धन-दौलत नहीं, बल्कि पवित्र दिल और सच्चे भाव की आवश्यकता होती है। जब इस दिव्य दरबार में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, तो वहां की अद्भुत सजावट, भक्तिमय वातावरण और मां जगदंबा के मनमोहक स्वरूप के दर्शन कर हर कोई भाव-विभोर हो उठ रहा है। नवरात्र के छठवें दिन यहां मां रानी को कढ़ी-चावल का विशेष भोग अर्पित कर भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जहां सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। यह छोटा मगर अत्यंत भव्य पंडाल पूरे शहडोल संभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां हर हृदय में भक्ति का दीप प्रज्वलित हो रहा है। हालांकि, इस भव्य धार्मिक आयोजन का दूसरा पहलू स्थानीय जिला प्रशासन और मध्य प्रदेश सरकार की सामाजिक कल्याण योजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जानकारी के अनुसार, यह वृद्ध महिला बीते कई वर्षों से शहडोल की सड़कों और फुटपाथों पर लाचार जिंदगी बिताने को मजबूर है। एक तरफ जहां सरकार बेघर, बुजुर्ग और असहाय नागरिकों के पुनर्वास, पक्के मकान और पेंशन देने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ संभागीय मुख्यालय की सड़कों पर जीवन यापन करने वाली यह महिला प्रशासनिक अमले की घोर उपेक्षा को उजागर कर रही है। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी का आलम यह है कि जिस महिला को पक्के आशियाने और नियमित राशन-स्वास्थ्य सुविधा की सख्त दरकार है, उसे फुटपाथ पर दिन गुजारना पड़ रहा है। इसके बावजूद, महिला का मनोबल और ईश्वर के प्रति निष्ठा इतनी डिग नहीं सकी; वह गणेश उत्सव से लेकर दुर्गा पूजा तक, अपनी जमा-पूंजी और निष्काम भाव से हर साल मूर्तियों की स्थापना करती हैं।

प्रशासनिक संवेदनहीनता के इस दौर में नगर के संवेदनशील समाजसेवियों ने इंसानियत और नागरिक कर्तव्य की अनूठी मिसाल पेश की है। समाजसेवी गौरव विक्रम लालवानी को जब इस महिला के संघर्ष और निष्काम भक्ति की जानकारी मिली, तो वे तुरंत अपने साथी सुशील (सिल्लू) रजक एवं अन्य सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचे। समाजसेवियों ने महिला के जज्बे को नमन करते हुए पंडाल के लिए वॉटरप्रूफ टेंट सामग्री, आकर्षक पर्दे, लाइटिंग, पूजन सामग्री और भंडारे का पूरा खर्च उठाया। इसके साथ ही बढ़ती ठंड को देखते हुए बुजुर्ग महिला को ओढ़ने-पहनाने के लिए गरम कपड़े और दैनिक जरूरत का सामान भेंट किया गया। समाजसेवियों का यह कदम जहां एक ओर सराहनीय है, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन, नगर पालिका अमले और महिला एवं बाल विकास विभाग के संबंधित अधिकारियों को आईना दिखाता है। स्थानीय प्रबुद्धजनों का कहना है कि प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेकर इस असहाय वृद्धा को उचित शासकीय आवास और आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि अपनी जिंदगी के अंतिम पड़ाव में उन्हें फुटपाथ की दुश्वारियों से मुक्ति मिल सके।

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