घोषणाओं के भंवर में उच्च शिक्षा,24 माह बीते, पर शहडोल में धरातल पर नहीं उतरा शासकीय डिग्री कॉलेज

सीएम के ऐलान के बाद भी प्रशासनिक सुस्ती कायम,बजट व वेतन पर रोक से ठप हुई व्यवस्थाएं, कलेक्टर से गुहार


Junaid Khan - शहडोल। शासकीय कॉलेज की घोषणा पर लगा लालफीताशाही का ग्रहण, छात्रों का भविष्य अधर में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 13 जनवरी 2024 को शहडोल प्रवास के दौरान शासकीय महाविद्यालय स्थापित करने की घोषणा की गई थी। हालांकि, पूरे दो वर्ष (24 माह) बीत जाने के बावजूद यह घोषणा केवल कागजी पुलिंदों और प्रशासनिक पत्राचार तक ही सीमित रह गई है। मुख्यमंत्री ने एबीवीपी की मांग पर पुरानी डिग्री कॉलेज परिसर में ही इस नए शासकीय कॉलेज के संचालन का भरोसा दिया था, लेकिन जिला प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग की उदासीनता के कारण अब तक एक भी ईंट आगे नहीं बढ़ सकी है। उल्लेखनीय है कि पंडित शंभूनाथ शुक्ल शासकीय महाविद्यालय को विश्वविद्यालय में अपग्रेड किए जाने के बाद से शहर में कोई पृथक शासकीय कॉलेज नहीं बचा। विश्वविद्यालय स्वायत्त (ऑटोनॉमस) होने के चलते यहां शिक्षा काफी महंगी है। इसका सीधा खामियाजा स्थानीय एवं ग्रामीण अंचल के निर्धन छात्रों को भुगतना पड़ रहा है, जो 'पीएम श्री कॉलेज' जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं और बेहतर उच्च शिक्षा के लाभ से वंचित हो रहे हैं। वेतन पर अचानक रोक से स्टाफ में हड़कंप, कलेक्टर कार्यालय पहुंचे परेशान प्रोफेसर व कर्मचारी एक ओर जहां नया कॉलेज शुरू करने में जिम्मेदार अधिकारी घोर लापरवाही बरत रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ 54 अधिकारियों एवं कर्मचारियों का वेतन महाविद्यालय हेड से अचानक रोक दिया गया है। अक्टूबर माह के 19 दिन बीत जाने के बाद भी प्रोफेसर्स, क्लर्क व अन्य कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं हो सका है। जिला कोषालय अधिकारी द्वारा 28 फरवरी 2018 के एक पुराने प्रावधान का हवाला देकर वेतन आहरित करने में असमर्थता जताने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। इस गंभीर स्थिति से क्षुब्ध होकर पीड़ित प्रोफेसरों और कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को कलेक्टर पार्थ जायसवाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और अपनी मूलभूत वेतन संबंधी समस्या का शीघ्र से शीघ्र निराकरण कराने की पुरजोर मांग उठाई। भवन विवाद को दरकिनार कर नए स्थान पर संचालन की मांग, शासन के पाले में गेंद शासकीय रिकॉर्ड की मानें तो पुराना डिग्री कॉलेज भवन एवं इसके संसाधन आज भी उच्च शिक्षा विभाग के ही अधीन दर्ज हैं, और संचालक उच्च शिक्षा भोपाल को रीवा एडी द्वारा प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ढुलमूल रवैये के चलते भवन आवंटन की गुत्थी सुलझ नहीं पा रही है। स्थानीय अभिभावकों और छात्र संगठनों का स्पष्ट कहना है कि यदि पुराने भवन को लेकर कोई वैधानिक या तकनीकी पेंच है, तो सरकार और जिला प्रशासन को शहडोल शहर में किसी नए स्थान का चयन कर तुरंत शासकीय डिग्री कॉलेज का संचालन शुरू करना चाहिए। वर्तमान में बढ़ती छात्र संख्या और जिले के शैक्षणिक ढांचे को देखते हुए एक नए शासकीय कॉलेज की नितांत आवश्यकता है, ताकि क्षेत्र के हजारों युवाओं को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा मिल सके।

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