सीबीआइ व ईडी का फर्जी खौफ दिखाकर जालसाजों ने जाल में फंसाया, पत्नी की एफडी तुड़वाकर आरटीजीएस से ट्रांसफर कराई रकम; पुलिस की मुस्तैदी से साइबर ठगों के नेटवर्क पर कसी नकेल
Junaid Khan - शहडोल। संभागीय मुख्यालय व आसपास के अंचलों में शातिर साइबर अपराधियों का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है। गिरोह के शातिर ठगों ने अब सीधे-साधे और सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ताजा सनसनीखेज मामला शहडोल जिले के थाना कोतवाली अंतर्गत वार्ड क्रमांक 18, घरौला मोहल्ला से सामने आया है, जहां साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) से वर्ष 2018 में अपर ग्रेड लिपिक पद से सेवानिवृत्त हुए 67 वर्षीय हरीश कुमार मिश्रा को डिजिटल अरेस्ट और फर्जी केस का डर दिखाकर 5 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम की ठगी कर ली गई। ठगों ने पीड़ित को सीबीआइ व ईडी जांच, मनी लॉन्ड्रिंग और जान से मारने की धमकी देकर इस कदर खौफजदा कर दिया था कि बुजुर्ग दंपत्ति अपनी जमा-पूंजी गंवाने पर मजबूर हो गए। हालांकि, पीड़ित द्वारा घटना की आपबीती बताते ही शहडोल पुलिस प्रशासन और साइबर सेल ने त्वरित संवेदनशीलता दिखाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों के निर्देश पर तत्काल जीरो पर अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई और कोतवाली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318(4) व 308 के तहत नंबरी अपराध कायम कर विवेचना शुरू कर दी है।
शातिर ठगों का सुनियोजित ताना-बाना, केनरा बैंक व मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर बुना खौफ का जाल घटनाक्रम की शुरुआत 08 सितंबर 2026 को हुई, जब पीड़ित हरीश कुमार मिश्रा के मोबाइल पर अनजान नंबर (7358754039) से एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को 'विजय खन्ना' बताते हुए अत्यंत सख्त लहजे में कहा कि "आपके आधार कार्ड का उपयोग कर केनरा बैंक में एक फर्जी खाता खोला गया है, जिसके जरिए नरेश गोयल नामक व्यक्ति करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग कर रहा है"। जालसाज ने फर्जीवाड़ा ऐसा रचा कि पीड़ित पूरी तरह सहम गया। इसके बाद 01 अक्टूबर 2026 को ठगों ने पीड़ित के व्हाट्सएप पर केनरा बैंक प्लैटिनम एटीएम कार्ड की फोटो और भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के फर्जी लोगो व मोहर लगे दस्तावेज भेजे। ठगों ने दावा किया कि आपके नाम से 247 एटीएम कार्ड जारी कराकर करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है, जिसकी जांच सीबीआइ दिल्ली और ईडी अधिकारी राहुल गुप्ता कर रहे हैं। जब पीड़ित ने कहा कि वह पुलिस में शिकायत दर्ज कराने जा रहा है, तो शातिर कॉलरों ने उन्हें जान से मारने ('गोली मार दूंगा') और सुप्रीम कोर्ट ट्रायल की धमकी देकर मुंह बंद रखने पर मजबूर कर दिया। पत्नी की एफडी तुड़वाई, यस बैंक के खाते में आरटीजीएस से जमा कराई रकम। पूरी तरह से मनोवैज्ञानिक दबाव और डर के साए में जी रहे सेवानिवृत्त कर्मचारी से ठगों ने उनके और परिवार के सभी बैंक खातों व एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) की जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद आरोपियों ने उनकी पत्नी के नाम पर रखी 6 लाख रुपये की एफडी को तुड़वाकर पीड़ित के एसबीआइ बैंक खाता (शाखा कुदरी रोड) में ट्रांसफर कराया। इसके उपरांत, 01 अक्टूबर 2026 को मोबाइल नंबर 7358754039 और 7587636140 के धारकों ने पीड़ित को यस बैंक (IFSC: YESB0000823, खाता क्र.: 082361900001747) का खाता विवरण भेजकर तत्काल 5,00,023.60 रुपये आरटीजीएस (RTGS) करने का निर्देश दिया। घबराए हुए पीड़ित ने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई में से 5 लाख रुपये बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। बाद में खुद के साथ हुई धोखाधड़ी का अहसास होने पर पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर शहडोल साइबर सेल का दरवाजा खटखटाया। प्रशासन व पुलिस की तत्परता की सराहना, नंबरी कायमी कर जांच में जुटी पुलिस
जैसे ही यह गंभीर मामला पुलिस प्रशासन के संज्ञान में आया, जिला पुलिस कप्तान के मार्गदर्शन में साइबर सेल शहडोल ने बिना एक पल गंवाए शून्य (0) पर प्राथमिकी (क्र. 40/2026) दर्ज कर प्राथमिक छानबीन शुरू की। तत्पश्चात, मामला थाना कोतवाली स्थानांतरित किया गया, जहां थाना प्रभारी निरीक्षक राजकुमार मिश्रा के नेतृत्व में अपराध क्रमांक 0519/2026 दर्ज कर विवेचना का प्रभार कार्यवाहक सहायक उपनिरीक्षक लालदास चौधरी (सं. 101) को सौंपा गया है। साइबर सेल की टीम उन मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और व्हाट्सएप चैटिंग के तकनीकी साक्ष्यों की बारीकी से पड़ताल कर रही है, ताकि अंतर्राज्यीय साइबर ठगों के नेटवर्क को दबोचा जा सके। पुलिस व प्रशासन की इस त्वरित व तत्पर कार्रवाई की क्षेत्र में सराहना हो रही है। साथ ही पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों और वरिष्ठजनों से अपील की है कि वे सीबीआइ, ईडी या डिजिटल अरेस्ट के नाम पर आने वाले किसी भी संदिग्ध कॉल या धमकी से न डरें और तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या साइबर सेल को सूचित करें।
