प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, कलेक्टर को ज्ञापन सौंप निरस्त करने की उग्र मांग
सहकारिता विभाग में नियमों की अनदेखी पर फूटा भारी जनाक्रोश।
Junaid khan - शहडोल। और प्रशासनिक गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, शहडोल और अनूपपुर जिले के सहकारिता महकमे में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक भूचाल आ गया है। सहकारिता समिति के प्रबंधक रोहित सिंह के सोहागपुर तबादले को लेकर विरोध की आग और भड़क उठी है। मध्य प्रदेश सहकारिता कर्मचारी महासंघ की जिला इकाई ने इस तबादले को नियमों को दरकिनार कर दिया गया आदेश करार दिया है और कलेक्टर सहित उच्चाधिकारियों के चौखट पर दस्तक देकर इसे तत्काल निरस्त करने का हुक्म बजाया है। आरोप है कि जिस अधिकारी पर अनूपपुर पदस्थापना के दौरान लगभग 10 लाख रुपये के बहुचर्चित धान घोटाले का संगीन आरोप लगा हुआ है और जिसकी विभागीय जांच अभी भी ठंडे बस्ते में लंबित है, उसे अभयदान देते हुए सोहागपुर की मलाईदार समिति में कैसे तैनात किया जा सकता है? इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक निष्पक्षता और विभागीय साख पर गहरे प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
बिना बैठक और सहमति के जारी हुआ तुगलकी फरमान, जिम्मेदार मौन,सहकारिता महासंघ ने तीखा हमला बोलते हुए खुलासा किया है कि रोहित सिंह की सोहागपुर समिति में नियम-विरुद्ध हुई यह पदस्थापना न केवल अनैतिक है, बल्कि बिना सक्षम कैडर कमेटी की बैठक और सोहागपुर समिति की पूर्व लिखित अनुमति के बिना रातों-रात गुपचुप तरीके से अंजाम दी गई है। महासंघ ने साफ शब्दों में इस स्थानांतरण आदेश को पूर्णतः "अधिकारिता विहीन" और फर्जीवाड़े को बढ़ावा देने वाला बताया है। सवाल यह उठता है कि क्या शासन-प्रशासन की नाक के नीचे भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिया जा रहा है? जिस 10 लाख रुपये के धान घोटाले ने पहले ही किसानों और गरीबों का हक मारा था, उस पर पर्दा डालने के लिए आखिरकार कौन-कौन से वरिष्ठ अधिकारी और सफेदपोश पर्दे के पीछे से इस पूरे खेल की पटकथा लिख रहे हैं? जांच की धीमी आंच और रसूखदारों पर गिर सकती है गाज। इधर,महासंघ ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए मांग रखी है कि अनूपपुर में रोहित सिंह के कार्यकाल के दौरान हुए कथित 10 लाख रुपये के धान घोटाले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच तय सीमा के भीतर पूरी की जाए। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि जांच के दौरान कोई भी दोषी पाया जाता है, चाहे वह कितना ही रसूखदार अधिकारी क्यों न हो, उस पर कठोरतम वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। यदि समय रहते इस दागी तबादला आदेश को निरस्त नहीं किया गया और निष्पक्ष जांच की आंच आगे नहीं बढ़ी, तो कर्मचारी महासंघ सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन और सहकारिता विभाग के आला हुक्मरानों की होगी।
