लापरवाही का के-स्क्वायर,15 मिनट लिफ्ट में घुटती रही सांसें,क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा मॉल प्रबंधन और प्रशासन?

मासूम की बटन दबाने की थ्योरी से अपनी नाकामी छिपाने में जुटा मॉल संचालक,पालिका और पुलिस के ढुलमुल रवैये पर भी उठे गंभीर सवाल 


Junaid Khan - शहडोल। बुढ़ार रोड स्थित के-स्क्वायर मॉल एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्थाओं की घोर अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सवालों के घेरे में है। उमरिया जिले के पाली निवासी सुनील कुमार मिश्रा अपने परिवार और मासूम बच्चे के साथ मॉल में फिल्म देखने पहुंचे थे, लेकिन वहां की तकनीकी अव्यवस्था के कारण उनका परिवार करीब 15 मिनट तक लिफ्ट में जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा। लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में बंद हो गई, अंदर अंधेरा छा गया और परिवार की सांसें फूलने लगीं। परिजनों द्वारा बार-बार चिल्लाने और आवाज लगाने के बावजूद मॉल का कोई भी कर्मचारी मदद के लिए मौके पर नहीं पहुंचा। आखिरकार जब कोई चारा नहीं बचा, तो पीड़िता परिवार ने मोबाइल से डायल 112 पर सूचना दी। पुलिस टीम के पहुंचने के दौरान अचानक लिफ्ट दोबारा चालू हुई और थर-थर कांपते परिवार को बाहर निकाला गया। इस पूरे घटनाक्रम ने के-स्क्वायर मॉल में सुरक्षा मानकों की पोल खोल कर रख दी है और यह साबित कर दिया है कि यहां आने वाले आम नागरिकों की जान राम भरोसे है। इस गंभीर हादसे के बाद मॉल प्रबंधन और संचालक बलमीत सिंह खनूजा का रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना और संदेहास्पद नजर आ रहा है। घटना के घंटों बाद भी संचालक का यह कहना कि 'उन्हें जानकारी ही नहीं थी', अपने आप में कई बड़े सवाल खड़े करता है। क्या इतनी बड़ी व्यावसायिक इमारत में कोई आपातकालीन कंट्रोल रूम या अलार्म मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं है? अपनी खामियों और लिफ्ट के मेंटेनेंस में हुई लापरवाही को छुपाने के लिए मॉल प्रबंधन अब बच्चे द्वारा बटन दबाने का हास्यास्पद तर्क दे रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या लिफ्ट की तकनीक इतनी लचर है कि चलती लिफ्ट में बटन दबाने से वह बीच हवा में अटक जाए? यदि ऐसी कोई व्यवस्था है, तो यह सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद खतरनाक चूक है, जिसका इस्तेमाल किसी भी अप्रिय घटना या आपराधिक साजिश के लिए हो सकता है। आपातकालीन नंबरों का लिफ्ट के अंदर बंद लाइट के कारण न दिखना यह साफ दर्शाता है कि मॉल का आपातकालीन पावर बैकअप पूरी तरह से ठप था। क्या मैनेजर और संचालक की यह सफाई महज अपनी गर्दन बचाने के लिए गढ़ा गया एक झूठ है? इसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होना बेहद जरूरी है। हद तो तब हो जाती है जब नगर पालिका, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग जैसे जिम्मेदार तंत्र केवल औपचारिकता निभाते दिखते हैं। नगर पालिका के बिल्डिंग अधिकारी शरद द्विवेदी का यह बयान कि 'इंजीनियर ऑडिट की जानकारी प्राप्त नहीं हुई है और संज्ञान लिया जाएगा', प्रशासनिक शिथिलता को उजागर करता है। जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए, तब तक क्या जिम्मेदार अधिकारी केवल फाइलों का इंतजार करेंगे? बिना लिफ्ट ऑडिट और सुरक्षा प्रमाण पत्र के मॉल का संचालन आखिर किसकी शह पर हो रहा है? स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। मांग की जा रही है कि पुलिस और जिला प्रशासन के-स्क्वायर मॉल के संचालक, मैनेजर और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करे। साथ ही नगर पालिका तुरंत लिफ्ट के मेंटेनेंस और ऑडिट रिपोर्ट की जांच कर मॉल की कार्यप्रणाली पर कड़े कदम उठाए, ताकि भविष्य में किसी निर्दोष परिवार की जान जोखिम में न पड़े।

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