सुनना और सवाल करना बंद होने से आता है सर्व सत्तावाद-उदय प्रकाश

ओपन माइक सत्र में जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान की अध्यक्षता में गूंजा अंचल का साहित्यिक स्वर

हिन्दी साहित्य सम्मेलन का दो दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन ‘कोतमा साहित्य उत्सव’ अभूतपूर्व सहभागिता और सफलता के साथ संपन्न 



Junaid Khan - शहडोल। कोतमा (अनूपपुर) साहित्य, समाज, संस्कृति और समकालीन समय के सवालों को केंद्र में रखकर हिन्दी साहित्य सम्मेलन का दो दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन ‘कोतमा साहित्य उत्सव’ साहित्यिक गरिमा, रचनात्मक ऊर्जा और वैचारिक संवाद के साथ अभूतपूर्व सहभागिता में संपन्न हुआ। उत्सव की शुरुआत प्रख्यात कथाकार उदय प्रकाश के गांव सीतापुर में आत्मीय संवाद से हुई। इसके पश्चात देश के विभिन्न हिस्सों से आए साहित्यकारों, कवियों, पत्रकारों और साहित्यप्रेमियों का काफिला कोतमा पहुंचा। शाम को आयोजित औपचारिक उद्घाटन समारोह में साहित्य और समाज से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक संवाद हुआ। कार्यक्रम का संचालन हिन्दी साहित्य सम्मेलन अनूपपुर इकाई के सचिव डॉ. कुमार ध्रुव ने किया तथा स्वागत भाषण अध्यक्ष अविनाश अग्रवाल ने दिया।

ओपन माइक सत्र में जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान की अध्यक्षता में युवा रचनाकारों ने दिखाई सृजनात्मक उड़ान

उत्सव के दूसरे दिन आयोजित ओपन माइक युवा रचना-पाठ सत्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, रीवा, सीधी, बिलासपुर सहित आसपास के अंचलों से आए युवा एवं क्षेत्रीय रचनाकारों ने अपनी कविताओं, गीतों और गजलों का पाठ किया। इस महत्वपूर्ण सत्र की अध्यक्षता शायर एवं जिला न्यायाधीश श्री हिदायत उल्ला खान ने की, जबकि युवा कवि एवं आलोचक डॉ. संतोष कुमार तिवारी ने रचनाओं पर समीक्षात्मक टिप्पणी प्रस्तुत की। अध्यक्षीय उद्बोधन में जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान ने साहित्य को समाज की संवेदना, स्मृति और चेतना का सशक्त माध्यम बताते हुए युवा एवं क्षेत्रीय रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि अंचल के रचनाकार अपनी मिट्टी, लोकजीवन, संस्कृति और सामाजिक अनुभवों को शब्द देकर साहित्य की व्यापक धारा को समृद्ध करते हैं। इसके पश्चात उन्होंने स्वयं अपनी कविता एवं ग़ज़ल का प्रभावशाली पाठ किया, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक सराहा। उनकी अध्यक्षता और रचना-पाठ ने इस सत्र को एक आत्मीय और यादगार साहित्यिक रंग प्रदान किया।

कहानी से कविता तक सजी साहित्य की विविध विधाएं

उत्सव में रचनापाठ के दो प्रमुख सत्र आयोजित हुए। प्रथम दिवस देश के सुविख्यात कहानीकारों ने वरिष्ठ साहित्यकार एवं दुष्यंत संग्रहालय के अध्यक्ष रामराव वामनकर की अध्यक्षता में कहानी-पाठ किया। कविता जी (प्रयागराज), मनीष वैद्य (देवास), पराग मांदले (भोपाल), सिनीवाली (नई दिल्ली), डॉ. निधि अग्रवाल (झांसी) और सोनाली पारे (भोपाल) ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। सत्र का संचालन वरिष्ठ कथाकार मनीष वैद्य ने किया। दूसरे दिन के रात्रिकालीन अंतिम रचना-पाठ सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार राम निहोर तिवारी ने की। इसमें शिव कुमार सिंह, डॉ. मुकेश कुमार, राम नरेश ‘निष्ठुर’, डॉ. शिवशंकर मिश्र ‘सरस’, इंदु श्रीवास्तव, दीपक जैन, विवेक चतुर्वेदी, विभूति तिवारी, कुंदन सिद्धार्थ, शेफाली शर्मा और अलंकृति श्रीवास्तव सहित अनेक रचनाकारों ने गीत, नवगीत, ग़ज़ल, नई कविता और हास्य-व्यंग्य की रचनाएं प्रस्तुत कीं। संचालन युवा शायर दीपक अग्रवाल ने किया। प्रख्यात कथाकार उदय प्रकाश ने भारतीय समाज की बहुलतापूर्ण सांस्कृतिक परंपरा पर विचार रखते हुए कहा कि भारत को किसी एक संबोधन, अभिवादन अथवा सांस्कृतिक पहचान में सीमित नहीं किया जा सकता। भारतीय समाज में अभिवादन, सत्कार और संबंधों को पुष्ट करने की अनेक परंपराएं रही हैं। उन्होंने विंध्य, बुंदेलखंड और मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अंचल की परंपराओं को किसी एक संकीर्ण परिभाषा में बांधा नहीं जा सकता। उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण पत्रकार-साहित्यकार डॉ. मुकेश कुमार की पुस्तक ‘मीडिया का कैरेक्टर ढीला’ का विमोचन रहा। प्रख्यात कथाकार उदय प्रकाश ने पुस्तक का विमोचन किया। इसके साथ ही वरिष्ठ बघेली-हिंदी हास्य-व्यंग्य कवि राम नरेश तिवारी ‘निष्ठुर’ के दो संग्रह ‘निष्ठुर रचना खंड 1’ और ‘निष्ठुर रचना खंड 2’ का भी विमोचन किया गया। इन रचनाओं ने उत्सव को लोकभाषा, लोकजीवन और हास्य-व्यंग्य की विशिष्ट रंगत प्रदान की।स्मृतियों, रिश्तों और साहित्य का उत्सव बना कोतमा कोतमा साहित्य उत्सव केवल साहित्यिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विंध्य अंचल की सांस्कृतिक स्मृति, स्थानीय रचनात्मकता और राष्ट्रीय साहित्यिक संवाद के मिलन का अवसर बना। उत्सव के दौरान अतिथियों ने मनेन्द्रगढ़ के समीप स्थित अमृतधारा जलप्रपात का भ्रमण भी किया। आयोजन में उमरिया, शहडोल, अनूपपुर और आसपास के अंचलों के साहित्यकारों, युवा रचनाकारों, पाठकों और साहित्यप्रेमियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। हिन्दी साहित्य सम्मेलन की उमरिया इकाई के अध्यक्ष योगेश पांडेय, सचिव शिवांश सेंगर, युवा कवि भूपेंद्र त्रिपाठी, आशीष सेंगर, बघेली लोक कवि रावेंद्र शुक्ला तथा वरिष्ठ साहित्यकार द्वारिका प्रसाद अग्रवाल सहित अनेक साहित्यप्रेमियों की सक्रिय उपस्थिति रही। आयोजकों ने कहा कि कोतमा साहित्य उत्सव का उद्देश्य अंचल में साहित्यिक संवाद की निरंतरता बनाए रखना तथा स्थानीय और राष्ट्रीय साहित्यिक परिदृश्य के बीच एक जीवंत सेतु निर्मित करना है। आयोजन को सफल बनाने में आयोजन समिति के संरक्षक मंडल के सदस्य पूर्व विधायक मनोज कुमार अग्रवाल, समन्वयक संतोष कुमार द्विवेदी, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष इकबाल हुसैन बोहरा, देवेश सिंह गहरवार, ऋषभ जैन चंदेरिया, राजकुमार गोयनका एड, अमरेंद्र सिंह परिहार एड, धीरेंद्र जैन, पल्लवी अग्रवाल, मो. यासीन, कैलाश पाटकर, के.के. सोनी सहित अनेक सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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