स्टेशनों पर घंटों भटकने को मजबूर जनता,स्थानीय रेल प्रशासन की चुप्पी से गहराया आक्रोश
Junaid Khan - शहडोल। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के शहडोल संभाग से होकर गुजरने वाली लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनों की रफ्तार पर मानों ब्रेक सा लग गया है। पिछले एक सप्ताह से भी अधिक समय से दर्जनों प्रमुख एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 2 से 3 घंटे की देरी से चल रही हैं। इस व्यवस्थागत लापरवाही का खामियाजा प्रतिदिन सफर करने वाले हजारों आम यात्रियों को स्टेशन के प्लेटफार्मों पर घंटों बैठकर भुगतना पड़ रहा है। सबसे दयनीय स्थिति आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने-जाने वाले दैनिक यात्रियों की बनी हुई है। ट्रेनों के समय पर न पहुंचने के कारण स्टेशन उतरने के बाद उन्हें अपने दूर-दराज के गांवों तक जाने के लिए कोई नियमित साधन नहीं मिलते। विवश होकर यात्रियों को अत्यधिक किराया चुकाकर निजी वाहन बुक करने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी जेब पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है और समय की बर्बादी अलग से हो रही है। समय-सारिणी पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। कटनी-बिलासपुर ट्रेन, जिसका शहडोल पहुंचने का निर्धारित समय सुबह 5:00 बजे है, वह प्रतिदिन 2 घंटे की देरी से पहुंच रही है। इसी तरह कटनी-चिरमिरी ट्रेन, जिसका नियत समय सुबह 6:13 बजे है, वह भी डेढ़ घंटे के विलंब से सुबह 7:30 बजे के बाद शहडोल स्टेशन आ रही है। इसके अलावा उत्कल एक्सप्रेस, अमरकंटक एक्सप्रेस तथा दुर्ग-हमसफर जैसी सुपरफास्ट और वीआईपी ट्रेनें भी लगातार लेट चल रही हैं। यात्रियों की इस गंभीर समस्या पर स्थानीय रेल अधिकारी एवं जिम्मेदार प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठा है। स्टेशन पर ट्रेन पूछताछ खिड़की (इन्क्वायरी काउंटर) पर तैनात कर्मचारियों के पास भी ट्रेनों की सटीक व पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं रहती, जिसके कारण यात्रियों को कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता और भ्रम व परेशानी की स्थिति और अधिक बढ़ जाती है। एक तरफ जहां सरकार रेल सुविधाओं के आधुनिकीकरण और विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर जिम्मेदार अधिकारियों की ढुलमुल कार्यशैली और लचर मॉनिटरिंग के कारण आम जनता पिस रही है। ट्रेनों के अकारण विलंब से चलने के कारण नौकरीपेशा वर्ग, मरीज, छात्र और व्यापारी समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। रेलवे बोर्ड व बिलासपुर मंडल के उच्च अधिकारियों द्वारा ट्रेनों के परिचालन को सुचारू बनाने के लिए कोई ठोस योजना लागू नहीं की जा रही है। यदि रेल प्रशासन ने समय रहते ट्रेनों की समय-सारिणी को दुरुस्त करने और पूछताछ प्रणाली को पारदर्शी बनाने की दिशा में त्वरित व कड़े कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में यात्रियों का यह बढ़ता आक्रोश उग्र जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।
