विमानन मंत्री से मिला अहम आश्वासन
Junaid khan - शहडोल। शहडोल संसदीय क्षेत्र की ऊर्जावान और विकासोन्मुख सांसद हिमाद्री सिंह ने क्षेत्र की वर्षों पुरानी बहुप्रतीक्षित मांग को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रशासनिक एवं शासकीय स्तर पर अपनी मजबूत और दूरदर्शी पैरवी तेज कर दी है। शहडोल स्थित लालपुर हवाई अड्डे (Lalpur Airstrip) के तकनीकी सर्वेक्षण और सर्वांगीण विकास को लेकर सांसद ने मध्य प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र प्रेषित कर राज्य सरकार की ओर से तत्काल औपचारिक प्रस्ताव केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्रालय को भेजने का पुरजोर आग्रह किया है। सांसद की इस सक्रिय और दूरगामी पहल से न केवल शहडोल संभाग में हवाई सेवा की संभावनाएं पंख फैलाती दिख रही हैं, बल्कि क्षेत्र के उद्योग, व्यापार, पर्यटन और जन-जन की सुविधा के लिए एक स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत होती नजर आ रही है। सांसद हिमाद्री सिंह ने अपने पत्र में केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री राममोहन नायडू से हुई हालिया उच्चस्तरीय चर्चा और उनके उत्तर (D.O. No. AV-31014/78/2026-DT) का विशेष हवाला दिया है। केंद्रीय मंत्री द्वारा साझा की गई महत्वपूर्ण जानकारी के अनुसार, लालपुर हवाई अड्डे के लिए राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रालय को प्राप्त नहीं हुआ था। हालांकि, केंद्रीय मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) राज्य सरकार के अनुरोध पर कंसल्टेंसी के आधार पर इस स्थल के प्री-फिजिबिलिटी स्टडी (Pre-Feasibility Study) के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके साथ ही, 'UDAN' (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के अंतर्गत शुरू किए गए 'चैलेंज मोड फ्रेमवर्क' के तहत राज्य सरकारों से क्षेत्रीय संपर्क आवश्यकताओं के आधार पर उपयुक्त हवाई अड्डों को नामित करने का आह्वान किया गया है। इसके लिए बाधा मुक्त भूमि की उपलब्धता, बुनियादी ढांचा, ट्रैफिक क्षमता और वैधानिक मंजूरियों जैसे कड़े मानकों का मूल्यांकन किया जाएगा। सांसद हिमाद्री सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से निवेदन किया है कि क्षेत्रीय विकास और जनहित के दूरगामी महत्व को देखते हुए लालपुर हवाई अड्डे के प्रस्ताव को सभी आवश्यक दस्तावेजों, भूमि आवंटन की स्थिति एवं तकनीकी रिपोर्ट के साथ केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्रालय को जल्द से जल्द भेजा जाए, ताकि इस परियोजना को 'UDAN' योजना के तहत प्राथमिकता से शामिल किया जा सके। सांसद की इस जमीनी व तत्परता से की गई पैरवी के बाद अब गेंद प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों के पाले में है। प्रशासनिक अधिकारियों एवं संबंधित विभागों से अपेक्षा की जा रही है कि वे बिना किसी प्रशासनिक शिथिलता के सभी तकनीकी औपचारिकताएं, भूमि की बाधा मुक्ति और वैधानिक मंजूरियों संबंधी प्रतिवेदन तुरंत तैयार कर राज्य शासन के माध्यम से केंद्र को प्रेषित करें, जिससे विंध्य व शहडोल अंचल के विकास को एक नई ऊंचाई मिल सके।
