दारुल उलूम देवबंद के केंद्रीय सम्मेलन में भोपाल व शहडोल समेत प्रदेशभर के प्रतिनिधियों ने की शिरकत, शासन-प्रशासन और सामाजिक सरोकारों के बीच मदारिस की शैक्षणिक व कौमी सेवाओं पर मंथन
Junaid Khan - शहडोल। भोपाल। दारुल उलूम देवबंद के तत्वावधान में आयोजित 'कुल हिंद राब्ते मदारिसे इस्लामिया अरबिया' की केंद्रीय मजलिसे आमिला और मजलिसे उमूमी के गरिमामय प्रांतीय व राष्ट्रीय इजलास में मध्य प्रदेश का सशक्त प्रतिनिधित्व देखने को मिला। सम्मेलन में राज्य की ओर से राब्ता मदारिसे इस्लामिया मध्य प्रदेश के सदर हज़रत मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अहमद खान साहब और नाजिमे उमूमी हज़रत मौलाना मुफ्ती ज़िया उल्लाह साहब क़ासमी ने विशेष रूप से शिरकत की। मजलिसे उमूमी के सत्र के दौरान हज़रत मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अहमद खान साहब ने पेश किए गए विभिन्न महत्वपूर्ण प्रस्तावों का पुरजोर समर्थन (ताईद) किया। उन्होंने प्रदेशभर से आए मदारिस के जिम्मेदारान और उलेमा-ए-किराम को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि वे अपने बयानात, भाषणों और शैक्षणिक आयोजनों में अकाबिरे दारुल उलूम देवबंद की ऐतिहासिक जद्दोजहद, स्वाधीनता संग्राम में दी गई कुर्बानियों और उनकी गिरां-कद्र सेवाओं का जिक्र अनिवार्य रूप से करें। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नई नस्ल अपने असलाफ (पूर्वजों) के महान इतिहास, बेमिसाल कुर्बानियों और देश व समाज के प्रति उनके योगदान से भली-भांति वाकिफ हो सके।
इस उच्चस्तरीय राष्ट्रीय बैठक में मध्य प्रदेश के सम्बद्ध (मरबूत) मदारिस के लगभग सभी प्रमुख जिम्मेदारान, उलेमा और असातिज़ा किराम ने उपस्थिति दर्ज कराई। राजधानी भोपाल से हज़रत मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अहमद खान साहब के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में हज़रत मौलाना मुफ्ती ज़ियाउल्लाह साहब क़ासमी, हज़रत मौलाना मुफ्ती रशीदुद्दीन साहब क़ासमी, जनाब मुहीउद्दीन साहब उर्फ बब्बू भाई देवास, हज़रत मौलाना मुफ्ती मोहम्मद तबरेज़ खान साहब जामई, जनाब हाजी मोहम्मद ज़करिया साहब शहडोल, जनाब मुफ्ती शकील अहमद साहब वाजिदी, जनाब मौलाना मोहम्मद इसहाक साहब, जनाब मौलाना मोहम्मद राशिद अंसारी साहब, जनाब मौलाना असजद साहब, जनाब मौलाना हुजैफा साहब, जनाब असअद साहब और जनाब मुआज साहब प्रमुख रूप से शामिल रहे। इस इजलास के माध्यम से धार्मिक व शैक्षणिक संस्थाओं के जिम्मेदारान ने एक सुर में समाज निर्माण, नैतिक शिक्षा और युवाओं के सही मार्गदर्शन का संकल्प दोहराया।
शैक्षणिक पारदर्शिता, प्रशासनिक नियमों के पालन और सामाजिक सद्भाव पर जोर: जिम्मेदार अधिकारियों का6 ध्यानाकर्षण सम्मेलन के दौरान न केवल शैक्षणिक विषयों पर चर्चा हुई, बल्कि मदारिस के संचालन, शासन-प्रशासन के दिशानिर्देशों के अनुपालन और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने जैसे प्रशासनिक पहलुओं पर भी गंभीर मंथन किया गया। बैठक में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि मदारिस न केवल धार्मिक और बुनियादी शिक्षा के केंद्र हैं, बल्कि देश की आज़ादी से लेकर आधुनिक दौर में अनुशासन, देशभक्ति और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने में भी इनकी ऐतिहासिक भूमिका रही है। इस परिपेक्ष्य में, सम्मेलन के माध्यम से संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और शासन के जिम्मेदार महकमों का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट किया गया कि मदारिस द्वारा संचालित लोक कल्याणकारी व शैक्षणिक गतिविधियों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाए। उलेमाओं ने कहा कि संस्थाओं के जिम्मेदारान हमेशा नियम-कायदों के तहत पारदर्शी ढंग से कार्य कर रहे हैं और आगे भी शासन-प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर शिक्षा के स्तर को सुधारने और कौमी एकता को मजबूती देने के लिए तत्पर रहेंगे। इसके साथ ही इजलास में यह बात भी प्रमुखता से रखी गई कि वर्तमान दौर में शैक्षणिक संस्थानों को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप ढालना और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। संबंधित शासकीय विभागों, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों व स्थानीय प्रशासन से भी यह अपेक्षा जताई गई कि वे मदारिस की जनहितकारी और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग की भावना बनाए रखें। प्रतिनिधियों ने साझा संदेश दिया कि जब समाज, शैक्षणिक संस्थान और शासन-प्रशासन एक साथ मिलकर कार्य करेंगे, तभी नई पीढ़ी को सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का सही बोध कराया जा सकेगा।
