पटाखों के अवैध भंडारण पर प्रशासन की खामोशी कहीं पड़ न जाए भारी, हादसों के मुहाने पर शहर

दीपोत्सव की आड़ में सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ा रहे डीलर,अमले की लापरवाही से जनमानस पर मंडराया बड़ा खतरा


Junaid Khan - शहडोल। दीपोत्सव पर पटाखों की भारी खेप पहुंची, सुरक्षा नियमों की अनदेखी से उपजा बड़ा संकट। दीपावली पर्व को लेकर जहां बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है, वहीं दूसरी ओर आतिशबाजी के थोक व फुटकर विक्रेताओं के पास पटाखों की भारी खेप पहुंच चुकी है। जिला प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में 31 लाइसेंस जारी किए गए हैं, जिन्हें एक निश्चित और निर्धारित मात्रा में ही आतिशबाजी के भंडारण की अनुमति दी गई है। हालांकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। शहर और ग्रामीण इलाकों के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में क्षमता से कई गुना अधिक बारूद का अवैध स्टॉक जमा कर लिया गया है। विगत वर्षों में पटाखा भंडारण स्थलों व बाजारों में हुए भयानक अग्निकांडों में कई मासूम लोगों की जान जा चुकी है, जिसके बावजूद प्रशासनिक महकमा पूरी तरह बेफिक्र बैठा है। हर बार की तरह हादसा हो जाने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागते हैं और केवल कागजी जांच की औपचारिकता निभाकर कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए समय रहते कड़े निरीक्षण, भौतिक सत्यापन और नियमों के सख्ती से पालन की सख्त जरूरत है।

अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल,हादसों के बाद ही क्यों जागता है जिम्मेदार महकमा?

स्थानीय रहवासियों और बुद्धिजीवियों का स्पष्ट आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों की शह और अनदेखी के कारण ही पटाखा कारोबारी सुरक्षा मानकों को हवा में उड़ा रहे हैं। घनी बस्तियों में स्थित गोदामों और दुकानों में बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के बारूद का पहाड़ खड़ा कर दिया गया है। आबंटन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही अवैध भंडारण का यह खेल धड़ल्ले से जारी है, लेकिन संबंधित पुलिस व राजस्व महकमा आंखें मूंदे बैठा है। यदि प्रशासनिक अमला समय पर औचक निरीक्षण कर अवैध रूप से जमा किए गए स्टॉक को जब्त नहीं करता और लाइसेंस की शर्तों की आड़ में जारी इस मनमानी पर अंकुश नहीं लगाता, तो दीपावली की खुशियां किसी बड़ी त्रासदी में तब्दील हो सकती हैं। शासन-प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से आम जनता में भारी आक्रोश पनप रहा है और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हादसों को रोकने के लिए इन कड़े सुरक्षा मानकों और दिशा-निर्देशों का पालन है अनिवार्य। आतिशबाजी के सुरक्षित क्रय-विक्रय और संभावित हादसों को रोकने के लिए शासन द्वारा स्पष्ट गाइडलाइन निर्धारित की गई है, जिसका कड़ाई से पालन कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अग्निशमन व्यवस्था। पटाखा भंडारण स्थलों और दुकानों पर पर्याप्त मात्रा में पानी, रेत की बाल्टियां और चालू हालत में सीज फायर (अग्निशामक यंत्र) की उपलब्धता अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। दुकानों की बनावट और सुरक्षित दूरी अस्थायी पटाखा बाजार की दुकानों की छत और दीवारें टीन शेड की होनी चाहिए। आग फैलने के जोखिम को कम करने के लिए दो दुकानों के बीच कम से कम 15 मीटर की दूरी रखी जानी चाहिए। सफाई व ज्वलनशील पदार्थों पर रोक। पटाखा बाजार के आसपास कचरे के ढेर न हों और नियमित सफाई की जाए। भंडारण स्थल के पास सिगरेट, बीड़ी या किसी भी प्रकार के ज्वलनशील पदार्थ के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध हो। विद्युत सुरक्षा व सतर्कता,बिजली की फिटिंग पूरी तरह दुरुस्त और सुरक्षित होनी चाहिए ताकि शार्ट सर्किट के कारण आगजनी की नौबत न आए। इसके साथ ही दुकानदारों व अमले को हर समय अलर्ट रहकर जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

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