चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल,केंद्र सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ बुलंद की आवाज
Junaid khan - शहडोल। लोकतंत्र की मर्यादाओं और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शहडोल का राजनीतिक पारा अचानक चढ़ गया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर युवा कांग्रेस शहडोल ने जिलाध्यक्ष अनुपम गौतम के नेतृत्व में 8 अक्टूबर 2026 को नगर के व्यस्ततम गांधी चौक पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी करते हुए केंद्र सरकार और ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद निष्पक्षता की मांग करता है, लेकिन वर्तमान स्थितियों में निष्पक्ष चुनाव प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसके लिए सीधे तौर पर संवैधानिक पद पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेह हैं। गांधी चौक पर हुए इस उग्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस व प्रशासन की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार की नीतियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया। इस उग्र विरोध-प्रदर्शन के दौरान पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष नरेंद्र मरावी, वरिष्ठ नेता राजेश सोंधिया, अभिषेक शुक्ला, सनी खान, इकराम अली, प्रभात शुक्ला, मुशरान खान, सत्यम कुशवाहा, सत्यम प्रजापति, इमरान खान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और युवा कार्यकर्ता मैदान में डटे रहे। वक्ताओं ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि निष्पक्ष संस्थाओं की साख बचाने के लिए यह लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ी जाएगी। प्रदर्शन के दौरान गांधी चौक पर भारी गहमागहमी का माहौल निर्मित हो गया, जिससे कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। कार्यकर्ताओं ने चेताया कि यदि संवैधानिक मर्यादाओं का हनन बंद नहीं हुआ और ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और अधिक आक्रामक रूप धारण करेगा।
प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल और सरकार की चुप्पी पर तीखे प्रहार
दूसरी ओर, इस पूरे मामले में जिला प्रशासन और पुलिस तंत्र की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला मुख्यालय के मुख्य चौराहे गांधी चौक पर दिन-दहाड़े हुए पुतला दहन और चक्काजाम जैसी स्थिति से स्थानीय प्रशासनिक एलआईयू (लाइंटेलिजेंस) और सुरक्षा व्यवस्था की मुस्तैदी की पोल खुल गई है। जिम्मेदार अधिकारी भले ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहे हों, लेकिन युवाओं का यह आक्रोश यह दर्शाने के लिए काफी है कि जनभावनाओं को दबाना अब आसान नहीं है। शासन और प्रशासन में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की खामोशी इस पूरे मामले को और तूल दे रही है। निष्पक्ष एजेंसियों पर उठ रहे उंगलियों के बीच शहडोल का यह प्रदर्शन अब पूरे विंध्य अंचल के राजनीतिक हलकों में चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है, जिसने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग दोनों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है।
