कलेक्टर के कड़े रुख के बाद भी नहीं थमी लापरवाही,जमुआ डंप साइट घोटाले में ठेकेदार को उपकृत करने का खेल उजागर

कलेक्टर के कड़े रुख के बाद भी नहीं थमी लापरवाही,जमुआ डंप साइट घोटाले में ठेकेदार को उपकृत करने का खेल उजागर


Junaid Khan - शहडोल। स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 योजना के तहत शहर के जमुआ डंप साइट पर लीगेसी वेस्ट रिमेडिएशन का काम कर रही ठेकेदार एजेंसी 'मेसर्स मिश्रा ट्रेडर्स' (सतना) और नगरपालिका प्रशासन के गठजोड़ ने प्रशासनिक अनुशासन की धज्जियां उड़ा दी हैं। 11 मार्च 2025 को 1.43 करोड़ रुपये का ठेका महज 4 माह में कचरे के पहाड़ को वैज्ञानिक तरीके से साफ करने के लिए दिया गया था। लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी कचरे का सेग्रीगेशन (छंटाई) करने वाली सबसे महत्वपूर्ण 'ट्रोमेल मशीन' मौके पर स्थापित नहीं की गई और कचरे को बिना किसी प्रक्रिया के गड्ढों में भरा जा रहा है। इस घोर लापरवाही और नियम विरुद्ध कार्यप्रणाली पर तत्कालीन सीएमओ आशा भंडारी द्वारा 26 नवंबर 2025, 23 जनवरी 2026, 20 फरवरी 2026 और 25 सितंबर 2026 को ठेकेदार को नोटिस जारी कर फटकार लगाई गई थी। वहीं कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने भी समय-सीमा (टीएल) बैठक में दो टूक आदेश दिया था कि बिना मशीन लगाए और काम की जमीनी प्रगति के ठेकेदार को एक भी रुपये का भुगतान न किया जाए।

जनप्रतिनिधियों और ठेकेदार की जुगलबंदी से दबाव, जेडी ऑफिस पहुंची 25 लाख की फाइल

प्रशासनिक प्रमुख और कलेक्टर के स्पष्ट रुख व निर्देशों को दरकिनार करते हुए नगरपालिका शहडोल के जिम्मेदार अधिकारी और प्रभावशाली जनप्रतिनिधि ठेकेदार को भुगतान दिलाने के लिए पूरी शिद्दत से जुट गए हैं। सूत्रों के अनुसार,जनप्रतिनिधियों और ठेकेदार के बीच बने मजबूत गठजोड़ के दबाव के चलते ही बिना काम पूरे और बिना मशीन स्थापित किए 25 लाख रुपये के भुगतान की फाइल तैयार कर सीधे जेडी (संयुक्त संचालक) कार्यालय को मंजूरी के लिए भेज दी गई है। इस संदर्भ में नगरपालिका अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल का कहना है कि नगरीय प्रशासन आयुक्त का पत्र प्राप्त हुआ था, जिसके आधार पर प्रक्रिया बढ़ाई गई। हालांकि, पूर्व में भी वर्क ऑर्डर जारी होने के डेढ़ माह के भीतर काम में फर्जी गति दिखाकर ठेकेदार को 28 लाख रुपये के बिल के बदले 20 लाख रुपये का भुगतान दिया जा चुका है। कचरा प्रबंधन के नाम पर बिना काम के सरकारी खजाने से रकम निकालने की इस हड़बड़ी ने नगरपालिका के अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अधिकारियों की चुप्पी और कागजी कार्रवाई पर उठे सवाल, क्या होगी सख्त कार्रवाई?

एक तरफ जहां जिला कलेक्टर पार्थ जायसवाल स्वच्छता अभियानों की निगरानी कर सख्त हिदायत दे रहे हैं, वहीं जमीनी स्तर पर नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी केवल पत्राचार और नोटिस का खेल खेलकर पूरे मामले की लीपापोती में लगे हैं। चार-चार नोटिस जारी होने के बावजूद जब ठेकेदार ने साइट पर ट्रोमेल मशीन और अन्य जरूरी उपकरण स्थापित नहीं किए, तो फिर किस मजबूरी या साठगांठ के तहत करोड़ों के प्रोजेक्ट में मनमानी की खुली छूट दी जा रही है? शहर के जागरूक नागरिकों और करदाताओं में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जनता के पैसों की सरेआम बंदरबांट की जा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और लापरवाही बरतने वाली सतना की मेसर्स मिश्रा ट्रेडर्स एजेंसी के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाएगा, या फिर फाइलों की आड़ में यह खेल यूं ही जारी रहेगा।

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