रामजी,अवधेश,छंगा,दादाभाई,लाला,अनिल,चुनटा,अकरम, पसीना,अफसर का लाला, मुराद,सैफ और लल्लू बनिया का खुला नेटवर्क; राष्ट्रपति पदक से सम्मानित एसपी डॉ. संजय अग्रवाल से गोपनीय एसआईटी जांच और मोबाइल लोकेशन ट्रेस कराने की मांग
Junaid Khan - शहडोल। जिले भर में अवैध कारोबारों पर पूर्ण प्रतिबंध और चुस्त-दुरुस्त कानून-व्यवस्था के बड़े-बड़े प्रशासनिक दावों के बीच जंगलों की आड़ में करोड़ों रुपये के जुए के अड्डे बेधड़क संचालित हो रहे हैं। पुलिस की पारंपरिक निगरानी और सूचना तंत्र को ठेंगा दिखाते हुए यह खौफनाक और अवैध खेल हर रोज शाम 6 बजे से सुबह 5 बजे तक निर्बाध रूप से चल रहा है। सूत्रों की मानें तो सोहागपुर थाना क्षेत्र, सिंहपुर के घने जंगलों तथा कोतवाली थाना क्षेत्र के लमरो, कठोतिया, छोटा बंधवा और मझौली जैसे इलाकों में 'तास कटपत्ति' और 'घोड़ी दाना' का बड़ा कारोबार पैर पसार चुका है। पुलिसिया दबिश से बचने के लिए जुए के ये फड़ रोज अपने ठिकाने बदलते हैं। करोड़ों के इस लेन-देन ने न केवल क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाला है, बल्कि दर्जनों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को कर्ज के दलदल, भयंकर गृहकलह और आत्महत्या जैसी दुखद परिस्थितियों की ओर धकेल दिया है। स्थानीय सूत्रों और गहराई से मिल रही। जानकारियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क को अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बाकायदा सुनियोजित तरीके से बांटा गया है। सिंहपुर थाना क्षेत्र के जंगलों में रामजी, अवधेश, छंगा और दादाभाई जैसे नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं, जो रोजाना नए ठिकानों पर फड़ सजा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, जमुई और सोहागपुर क्षेत्र में लाला व अवधेश की सक्रियता बताई जा रही है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नेटवर्क शहडोल कोतवाली थाना क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहाँ जंगल लमरो, कठोतिया, छोटा बंधवा और मझौली के इलाकों में अनिल, चुनटा, अकरम, पसीना, अफसर का लाला, मुराद, सैफ और लल्लू बनिया जैसे कट्टीदार बेखौफ होकर अपनी-अपनी चौपालें जमा रहे हैं। इन सभी कट्टीदारों द्वारा अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र में लाखों-करोड़ों का दांव लगवाया जा रहा है, जिससे साफ जाहिर होता है कि निचले स्तर पर कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है। इस पूरे अवैध कारोबार में सबसे बड़ा सवाल स्थानीय थाना और चौकी प्रभारियों की भूमिका को लेकर उठ रहा है। क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि कुछ जिम्मेदार पुलिसकर्मियों द्वारा मामूली धाराओं में खानापूर्ति वाली दिखावटी कार्रवाई करके मीडिया में सुर्खियां बटोर ली जाती हैं, जबकि पर्दे के पीछे करोड़ों का यह काला कारोबार बेधड़क जारी रहता है। आम जनता में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि राष्ट्रपति पदक से सम्मानित, सख्त छवि और निष्ठावान पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय अग्रवाल की छवि को इन मातहत कर्मचारियों की अनदेखी या कथित साठगांठ के कारण आघात पहुँच रहा है। कप्तान साहब को इस बात की भनक तक नहीं लगने दी जा रही है कि उनके जिले की चारों सीमाओं के भीतर किसकी शह पर इतने बड़े पैमाने पर कट्टीदार फल-फूल रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब मध्य प्रदेश शासन, गृह विभाग और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष हस्तक्षेप की उम्मीद जताई जा रही है। शहडोल की सम्मानित जनता और पीड़ित परिवारों ने एसपी डॉ. संजय अग्रवाल से सीधे गुहार लगाई है कि वे इस तंत्र को ध्वस्त करने के लिए एक विशेष गोपनीय टीम (SIT) का गठन करें। मांग की जा रही है कि इस जांच में किसी भी पुराने या संदिग्ध पुलिसकर्मी को शामिल न करते हुए नए और निष्पक्ष अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाए। साथ ही, संदेह के घेरे में आए थाना व चौकी प्रभारियों और पुलिसकर्मियों के मोबाइलों की लोकेशन व कॉल डिटेल्स की गहन तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि शहडोल की पावन धरा से इस अवैध सिंडिकेट का जड़ से सफाया हो सके और गरीब परिवारों का जीवन उजड़ने से बच सके।
