कलेक्टर ने जारी किया लीलो लाइन के निर्माण संबंधी अनुमति आदेश

आदेश की अवहेलना पर भारतीय न्याय संहिता अन्तर्गत होगा दण्डनीय 


Junaid khan - शहडोल। 05 दिसम्बर 2025- कलेक्टर एवं जिला मजिस्टेट डॉ. केदार सिंह ने लीलो लाइन के निर्माण संबंधी आदेश किया गया है। जारी आदेष में कहा गया है कि कार्यपालन यंत्री (अउदा.नि.) संभाग म.प्र.पा.ट्रां.कं.लि. सतना द्वारा 400 के.व्ही. बिरसिंहपुर (टीपीएस) कटनी के एक सर्किट का अमरकंटक के नये स्विचयार्ड में लीलो लाइन के निर्माण की अनुमति चाही गई है जो शहडोल जिले के तहसील बुढ़ार एवं सोहागपुर से होकर गुजरेगी। कलेक्टर ने भारतीय तार अधिनियम, 1885 एवं विद्युत अधिनियम, 2003 के सुसंगत प्रावधानों  के तहत प्राप्त आवेदन में वर्णित तहसील बुढ़ार के ग्राम बैगिन, कोयलहा, कुदरी, गारूहा, जवारी, सारंगपुर एवं खैरहा तथा तहसील सोहागपुर के ग्राम हरदी, मड़वा, केरहा, अमरहा, सिगुड़ी, भमरहा, भोंदलखार (वीरान), पठा, केलमनियाँ, बंधवाबड़ा, जुगवारी, देवरीटोला, मझगवां एवं लमरो में 400 के.व्ही. बिरसिंहपुर (टीपीएस) कटनी के एक सर्किट का अमरकंटक के नये स्विचयार्ड में लीलो लाइन कार्य करने के उद्देश्य से आवेदक कम्पनी को जनहित से जुड़े कार्य के विरोध में कोई अवरोध या व्यवधान प्रस्तुत किये जाने पर भारतीय तार अधिनियम, 1885 के धारा 16(1) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए आवेदक को अपनी अधिकारिता के अन्तर्गत किये जाने वाले कार्य को ऐसे प्रतिरोध अथवा व्यवधान को हटाकर जारी रखने की अनुमति प्रदान किया है। लाइन के निर्माण के दौरान भूस्वामियों को होने वाली भूमि फसल का भुगतान मध्यप्रदेश शासन राजस्व विभाग एवं विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 164 के अनुसार राजस्व अधिकारियों के माध्यम से निर्धारण कराकर संबंधित हितग्राही,कृषकों को कार्यपालन यंत्री संभाग सतना द्वारा भुगतान कर दिया जाएगा। उक्त कार्य से प्रभावित भूमियों के भूमि क्षति एवं फसल क्षति का निर्धारण यथाशीघ्र कराया जाकर कार्यपालन यंत्री, (अउदा.नि.) संभाग म.प्र.पॉ.ट्रां.कं.लि. सतना प्रभावित हितग्राही,कृषकों को उनके भूमि व फसल की क्षति का भुगतान करने के उपरान्त ही कार्य प्रारंभ करना सुनिश्चित करेंगे। उक्त आदेश की अवहेलना करने पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के अन्तर्गत संज्ञेय अपराध होकर दण्डनीय होगा। जारी आदेश में कहा गया है कि उक्त ग्रामों से किया जाने वाला निर्माण कार्य वृहद स्तर का होकर शीघ्र प्रारंभ होना है, जिसके कारण प्रत्येक भूमिस्वामी व कब्जाधारी को जिसकी भूमि का उपयोग विद्युत लाइन निर्माण व विस्तार के कार्य हेतु होना है, व्यक्तिगत रूप से सुना जाना व्यवहारिक नहीं है तथा यह आदेश एक पक्षीय रूप से पारित किया जाता है।

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