एक साल बाद भी जमीन एमपीआईडीसी के नाम दर्ज नहीं, मुख्यमंत्री ने जताई गहरी नाराजगी
Junaid khan - शहडोल। रीजनल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव (आरआईसी) 16 जनवरी 2025 में शहडोल को मिले करीब 32 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव अब तक कागजों से जमीन पर नहीं उतर सके हैं। निवेश की घोषणा को एक वर्ष बीत जाने के बावजूद उद्योग स्थापना की प्रक्रिया बेहद धीमी रफ्तार से चलने पर डॉ. मोहन यादव ने गंभीर चिंता जताई है। शहडोल जिले के बराछ, किरगी बहरा, मलौटी, खड्डा, दियापीपर, करी और सालेबहरा गांवों में उद्योगों के लिए चिन्हित भूमि की आबंटन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक यह जमीन एमपीआईडीसी के नाम दर्ज नहीं हो सकी है। इसके चलते उद्योगों के लिए आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने में लगातार देरी हो रही है।
मुख्यमंत्री के दौरे में उजागर हुई जमीनी हकीकत
08 फरवरी को मुख्यमंत्री शहडोल जिले के धनपुरी और गंधिया क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे। धनपुरी में जब उन्होंने अधिकारियों से उद्योग स्थापना की प्रगति की जानकारी ली, तो जिम्मेदार अधिकारियों ने देरी का ठीकरा सीधे एमपीआईडीसी भोपाल पर फोड़ दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल भोपाल से एक अधिकारी को गंधिया भेजा गया। ग्रीन हाउस में फिर उठा जमीन का मुद्दा गंधिया में आयोजित सभा के बाद मुख्यमंत्री ग्रीन हाउस पहुंचे, जहां उन्होंने एक बार फिर उद्योगों और जमीन आबंटन की स्थिति पर जानकारी मांगी। इस दौरान डॉ. केदार सिंह ने बताया कि कुछ प्रस्तावित जमीनें वन विभाग के अधीन होने के कारण अड़चन बनी हुई हैं। बताया जा रहा है कि लगातार सामने आ रही प्रशासनिक ढिलाई और अस्पष्ट जवाबों से मुख्यमंत्री का रुख काफी नाराजगी भरा रहा।
उद्योगों को लेकर मुख्यमंत्री सख्त, देरी बर्दाश्त नहीं
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में औद्योगिक निवेश को धरातल पर उतारने के लिए लगातार सक्रिय हैं। ऐसे में शहडोल जैसे संभागीय जिले में निवेश प्रस्तावों के बावजूद काम आगे न बढ़ना शासन स्तर पर गंभीर माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर जल्द कार्रवाई भी हो सकती है।
