नाबालिग को जेल भेजने का आरोप, शहडोल में प्रशासन कटघरे में,मुख्यमंत्री दौरे के विरोध के बाद बवाल,किशोर न्याय कानून पर उठा सवाल

विरोध प्रदर्शन से शुरू हुआ विवाद,अब कानूनी संकट में प्रशासन,कांग्रेस का आरोप: छात्र नेता नाबालिग था, फिर भी भेजा गया जेल 


Junaid khan - शहडोल। मुख्यमंत्री के धनपुरी दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के बाद की गई गिरफ्तारियां अब सिर्फ राजनीतिक विवाद नहीं रहीं, बल्कि कानून, संविधान और मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बन गई हैं। कांग्रेस ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि एक नाबालिग छात्र नेता को वयस्क बताकर जेल भेज दिया गया, जो सीधे तौर पर किशोर न्याय अधिनियम का उल्लंघन है। इस आरोप ने जिले में सियासी हलचल के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री के दौरे में उठा जनहित का मुद्दा

08 फरवरी को मुख्यमंत्री के धनपुरी आगमन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दूषित पेयजल, बिगड़ती कानून व्यवस्था और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर काले झंडे दिखाकर शांतिपूर्ण विरोध किया था। कांग्रेस का कहना है कि यह प्रदर्शन लोकतांत्रिक और अहिंसक था, जबकि प्रशासन ने इसे सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए बल प्रयोग किया।

लाठीचार्ज और गिरफ्तारी से भड़का विवाद

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। जयसिंहनगर विधानसभा अध्यक्ष शेख साजील उर्फ सनी, छात्र नेता सत्यम प्रजापति और आशु को गिरफ्तार कर अतिरिक्त धाराओं में जेल भेज दिया गया, जबकि अन्य कार्यकर्ताओं को जमानत पर रिहा किया गया। तीनों को बुढार जेल में बंद रखा गया, जिससे मामला और तूल पकड़ता गया। नाबालिग होने का दावा, दस्तावेज बने आधार विवाद उस वक्त गंभीर हो गया जब कांग्रेस नेता प्रदीप सिंह ने दावा किया कि गिरफ्तार छात्र नेता सत्यम प्रजापति की जन्मतिथि 22 मई 2008 है, जो उसकी दसवीं कक्षा की अंकसूची सहित अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों में दर्ज है। इस आधार पर 08 फरवरी को उसकी उम्र 18 वर्ष से कम थी और वह विधिक रूप से नाबालिग की श्रेणी में आता है। कांग्रेस का कहना है कि इसके बावजूद उसे वयस्क बताकर जेल भेज दिया गया।

राजनीतिक दबाव में कार्रवाई का आरोप

कांग्रेस का आरोप है कि थाना स्तर पर राजनीतिक दबाव में मेडिकल जांच कराई गई और दस्तावेजों की अनदेखी करते हुए तहसीलदार के समक्ष पेश कर नाबालिग को जेल भेज दिया गया। इसे किशोर न्याय अधिनियम और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन बताया गया है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

कानून क्या कहता है

किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति नाबालिग माना जाता है। ऐसे मामलों में सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष होती है और नाबालिग को जेल भेजने का कोई प्रावधान नहीं है। उम्र निर्धारण में स्कूल या जन्म प्रमाणपत्र को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि मेडिकल जांच अंतिम विकल्प मानी जाती है।

प्रशासन का पक्ष

पुलिस का कहना है कि आरोपी की ओर से कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया था और उसने स्वयं अपनी उम्र 18 वर्ष बताई थी, जिसके आधार पर मेडिकल जांच कराई गई। तहसीलदार का भी कहना है कि प्रस्तुत अभिलेखों में उम्र 18 वर्ष दर्ज थी, उसी आधार पर आदेश पारित किया गया।

कलेक्ट्रेट में कांग्रेस का धरना,रिहाई की मांग 

इधर, निर्दोष कांग्रेस कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी शहडोल ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष अजय अवस्थी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि विरोध प्रदर्शन विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है, जिसे दबाने के लिए दमनात्मक कार्रवाई की गई। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को जल्द रिहा नहीं किया गया, तो पार्टी आमरण अनशन सहित उग्र आंदोलन करेगी।

राजनीतिक और कानूनी टकराव तेज 

यह मामला अब प्रशासनिक प्रक्रिया, कानून के पालन और लोकतांत्रिक अधिकारों की कसौटी बन गया है। यदि जांच में नाबालिग को जेल भेजे जाने की पुष्टि होती है, तो यह प्रशासन की बड़ी कानूनी चूक मानी जाएगी। फिलहाल, कांग्रेस आंदोलन की तैयारी में है और प्रशासन अपने फैसले को सही ठहराने में जुटा है। आने वाले दिनों में शहडोल की राजनीति और कानून व्यवस्था पर इसका असर और गहराने की संभावना है।

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