आश्रम की छात्राओं का कलेक्ट्रेट तक मार्च

भोजन, मारपीट और जबरन काम कराने के आरोप; सहायक आयुक्त ने मानीं शिकायतें, जांच टीम गठित


Junaid khan - शहडोल। जिले के गोहपारू स्थित एसटी सीनियर बालिका कन्या आश्रम में रह रही कक्षा 6वीं से 8वीं की छात्राओं ने गुरुवार को अचानक कलेक्ट्रेट पहुंचकर हड़कंप मचा दिया। स्कूली ड्रेस में पहुंची इन छात्राओं ने सहायक आयुक्त आनंद राय सिन्हा के समक्ष आश्रम प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए।छात्राओं का कहना था कि आश्रम अधीक्षिका और एक शिक्षिका द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं दिया जाता, छोटे-छोटे कामों के नाम पर उनसे जबरन श्रम कराया जाता है तथा विरोध करने पर मारपीट भी की जाती है। छात्राओं ने यह भी बताया कि उनकी शिकायतों पर आश्रम में कोई सुनवाई नहीं होती, जिससे वे मजबूर होकर सीधे कलेक्ट्रेट पहुंचीं। 

बिना सूचना पहुंचीं कलेक्ट्रेट 

जानकारी के अनुसार छात्राएं सुबह आश्रम से स्कूल के लिए निकली थीं, लेकिन विद्यालय जाने के बजाय सीधे कलेक्ट्रेट पहुंच गईं। स्कूल प्रबंधन को इसकी भनक तक नहीं लगी। मामला सामने आते ही प्रशासनिक अमले में हलचल मच गई। सहायक आयुक्त आनंद राय सिन्हा ने छात्राओं की पूरी बात गंभीरता से सुनी और तत्काल वाहन की व्यवस्था कर दो महिला कर्मचारियों के साथ उन्हें सुरक्षित आश्रम भिजवाया। इसके बाद वे स्वयं आश्रम पहुंचे और प्रबंधन व स्कूल प्रशासन से विस्तृत चर्चा की। प्राथमिक जांच में शिकायतें सही सहायक आयुक्त ने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर छात्राओं की कुछ शिकायतें सही पाई गई हैं। स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक रूप से महिला स्टाफ की तैनाती की गई है ताकि छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित हो सके। छात्राओं के अभिभावकों को भी मौके पर बुलाकर चर्चा की गई और उन्हें आश्रम की व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। बीईओ सहित जांच दल गठित प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए बीईओ और दो महिला अधिकारियों की टीम बनाई गई है। यह टीम आश्रम की व्यवस्थाओं, भोजन गुणवत्ता, अनुशासन व्यवस्था और छात्राओं के आरोपों की विस्तृत जांच करेगी। साथ ही छात्राओं को समझाइश दी गई कि भविष्य में किसी भी समस्या की जानकारी पहले संबंधित अधिकारियों या अभिभावकों को दें, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। यह मामला जिले में आदिवासी छात्राओं के आश्रमों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है।

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