जेल से समय पर रिहा किया गया छात्र, जानबूझकर नहीं पहुंचा परीक्षा केंद्र: कलेक्टर डॉ. केदार सिंह
सीएम कार्यक्रम में उपद्रव पर कार्रवाई, छात्र को परीक्षा से 2 घंटे पहले छोड़ा गया
Junaid khan - शहडोल। कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने सी.एम. के कार्यक्रम में काला झंडा दिखाने वाले नाबालिग को भेजा जेल, 12वी की परीक्षा छूटी से संबंधित समाचार पत्र के संबंध में वस्तुस्थिति से अवगत कराया है कि दिनांक 08, फरवरी 2026 को जिला शहडोल में माननीय मुख्यमंत्री जी के भ्रमण के दौरान धनपुरी नगरपालिका में कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी के काफिले को रोकने एवं काले झण्डे दिखाने का प्रयास किया गया। काफिले की गाडियों के पीछे नोर बाजी करते हुए दौड़ रहे थे। उपद्रवी लोगों के हाथों में झण्डे डण्डे थे। कानून व्यवस्था को ध्यान में रखकर तत्काल उनके विरूद्ध प्रशासन एवं पुलिस द्वारा कार्यवाही की गई और मौके से लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी में सत्यम पिता अमृतलाल भी शामिल था। घटना स्थल से गिरफ्तार किये गये उपद्रवी लोंगो को पुलिस द्वारा कानून एवं शांति बनाये रखने की दृष्टि से उनके विरूद्ध प्रकरण तैयार कर तहसीलदार के समक्ष में प्रस्तुत किया गया। तहसीलदार द्वारा जमानत के आभाव में उन्हे जेल भेजा गया। दिनांक 09, फरवरी 2026 को रात्रि करीब 08:30 बजे मुझे दूरभाष पर जानकारी प्राप्त हुई कि जो लोग गिरफ्तार किये गये हैं, उनमें एक 12वीं कक्षा का छात्र है और दिनांक 10, फरवरी 2026 को उसे परीक्षा में सम्मिलित होना है।
मेरे द्वारा बुढ़ार जेलर से दूरभाष पर सत्यम की जानकारी प्राप्त की गई। तहसीलदार बुढ़ार से दिनांक 09, फरवरी 2026 को ही रात्रि में रिहाई आदेश जारी किया गया जो रात्रि 10.15 पर जेल पर तामील किया गया। जेल नियमावली के अनुसार बंदियों को जेल से छोड़े की कार्यवाही शांम को सूर्यास्त के बाद और प्रातः सूर्योदय के पहले रिहाई नहीं की जा सकती। अनावेदक सत्यम पिता अमृत लाल को प्रातः 6:55 बजे जेल से रिहा किया गया साथ ही उसे जेल प्रहरी श्री ज्ञान द्वारा बुढार बस स्टेण्ड से शहडोल के लिये बस में बिठाया एवं शहडोल तक आने के लिये 50/- रूपये किराया नगद दिये गये। अ.जा.क. थाना शहडोल में पदस्थ आरक्षक श्री अशोक धुर्वे भी बुढार से उसी बस में शहडोल आ रहे थे, उनको बताया गया कि इसको शहडोल लेकर जाना है। श्री धुर्वे साथ वह भी लगभग 08:00 बजे शहडोल पहुंच गया।
सत्यम द्वारा आरक्षक के फोन से अपने किसी परिचित को बताया गया कि प्रवेश पत्र लेकर सीधे परीक्षा केन्द्र आ जायें, वही सीधे परीक्षा केन्द्र पर पहुंच रहा है परन्तु अनावेदक सत्यम शहडोल में बस से उतरकर परीक्षा केन्द्र पर नहीं गया और न ही वह परीक्षा में सम्मिलित हुआ। समाचार पत्र में यह प्रकाशित समाचार कि नाबालिग छात्र परीक्षा से वंचित हुआ, सही नहीं है। उसे परीक्षा प्रारंभ होने से लगभग 02:00 घंटे पहले जेल से रिहा कर दिया गया था और उसे शहडोल तक पुलिस की उपस्थिति में पहुंचाया गया। अनावेदक सत्यम जानबूछकर परीक्षा में सम्मिलित नहीं हुआ। परीक्षा केन्द्र में नहीं पहुंचने, परीक्षा में शामिल नहीं होने की पुष्टि दिनांक 10, फरवरी 2026 को परीक्षा के केन्द्र अध्यक्ष एवं और निरीक्षण दल से कराई गई तथा प्रमाणीकरण प्राप्त किया गया। प्रमाणीकरण के साथ परीक्षा में शामिल छात्रों की सूची भी प्राप्त की गई।
नाबालिग होने के संबंध में पुलिस तथा तहसीलदार कार्यालय में किसी प्रकार का दस्तावेज/साक्ष्य अनावेदक सत्यम अथवा उनके अधिवक्ता अथवा अन्य किसी माध्यम से प्रस्तुत नहीं किया गया। गिरफ्तारी के पूर्व एवं बाद में नाबालिग होने की पर किसी प्रकार की पुष्टि नहीं हुई। अनावेदक सत्यम पिता अमृत लाल की ओर से कोई जमानत प्रस्तुत नहीं की गई है बल्कि उसकी परीक्षा को ध्यान में रखते हुए उसके मौखिक सूचना पर तहसीलदार द्वारा रिहा किया गया।
