कठौतिया में एकादशी के पावन संयोग पर हुआ श्रीराम-जानकी विवाह,भक्ति में सराबोर हुआ पंडाल
Junaid khan - शहडोल। जिले के ग्राम कठौतिया स्थित स्व. ठा. रामदास सिंह जोधावत खेल मैदान में चल रहे नौ दिवसीय ‘श्रीराम महायज्ञ एवं संगीतमय श्रीराम ज्ञान यज्ञ कथा’ के पंचम दिवस (शुक्रवार) को भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। एक ओर जहां एकादशी का पावन पर्व था, वहीं दूसरी ओर कथा मंच पर श्रीराम-जानकी विवाह का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। कथा के दौरान मानस विदुषी देवी चंद्रकला जी ने एकादशी तिथि के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एकादशी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। यह व्रत मात्र अन्न त्याग नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि, संयम और भक्ति का महापर्व है। उन्होंने कहा कि एकादशी का विधिपूर्वक व्रत और इस दिन श्रीराम कथा का श्रवण करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है तथा अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। विवाह प्रसंग से पूर्व एकादशी की महिमा के वर्णन ने पूरे पंडाल को गहन भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत कर दिया। एकादशी के पावन संयोग ने राम विवाह के उल्लास को दोगुना कर दिया। गाजे-बाजे के साथ भगवान की भव्य बारात निकाली गई। पूरा पंडाल आतिशबाजी की रोशनी और “जय श्री राम” के जयघोष से गूंज उठा। विवाह के मंगल गीतों पर श्रद्धालु झूम उठे। भक्तिमय वातावरण में श्रीराम-जानकी विवाह की झांकी ने सभी को भावविभोर कर दिया। महाआरती के पश्चात विवाह उत्सव और एकादशी के उपलक्ष्य में प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की। कथा व्यास ने जानकारी दी कि छठे दिवस की कथा में ‘केवट प्रसंग’ और भगवान श्रीराम के वन गमन की मार्मिक कथा सुनाई जाएगी। राज्याभिषेक की तैयारियों के बीच पिता के वचन की मर्यादा निभाते हुए प्रभु श्रीराम का वन गमन कथा का मुख्य आकर्षण रहेगा, जो श्रोताओं को भावुक कर देगा। यज्ञ समिति के अध्यक्ष श्री अभिमान सिंह जोधावत एवं संयोजक अशोक सिंह जोधावत ने बताया कि यज्ञाचार्य पंडित श्री सीताराम समाधिया के सानिध्य में चल रहे इस धार्मिक अनुष्ठान का समापन 18 फरवरी 2026 को होगा। समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा का लाभ लेने की अपील की है।

