रमज़ान से जुड़े हुए सवाल-जवाब इस्तिकबाले रमज़ान-मोहम्मद तौफीक़ अहमद मिस्बाही

रमज़ान से जुड़े हुए सवाल-जवाब इस्तिकबाले रमज़ान-मोहम्मद तौफीक़ अहमद मिस्बाही 


Junaid khan - शहडोल। उम्मते मुस्लिमा के लिए साल का सब से मुबारक और रूहानी मौका है ,जिसमें रोज़ा , तिलावते कुरआन,तरावीह और सदकातके ज़रिए तकवा और मग़फिरत हासिल की जाता है शाबान से ही ज़हनी और अमली तैयारी गुनाहों से तौबा ,और अहकामे रमज़ान सीख कर इस रहमतों भरे महीने का खैर मक़दम कर हर मोमिन की जिम्मे दारी है। रमजानुल मुबारक ईमान वालों के लिए अल्लाह ताला का एक अज़ीम तोहफा है ,जिसका इंतज़ार साल भर किया जाता है ये महीना नेकियों की बहार, जहन्नुम से आज़ादी,और रिज़क़ में बरकत का महीना है इस मुबारक महीने की आमद पर मुसलमान इंतहाई ख़ुशी और अक़ीदत से इसका इस्तकबाल करता है। इस्तिकबाले रमज़ान के अमली इक़दमात-

 1-सच्ची तौबा: रमज़ान के दाख़िल होने से पहले पिछले तमाम गुनाहों से सच्ची तौबा की जाए ताकि अल्लाह की रहमतें और बरकतें हासिल हो।

2-अहकाम सीखना: रोजा़ तरावीह और एतकाफ के मसाइल व फज़ाईल सीखे जाएं ताकि इबादत सही तरीके़ से अदा हो।

3-रोजे़ की मश्क़: रमजान से पहले कुछ रोजे रखकर जिस को भूख और प्यास का आदि बनाया जाए। 

4-तिलावत का मामूल: कुराने पाक से अपना ताल्लुक मजबूत करें क्योंकि यह कुराने पाक के नुजू़ल का महीना है।

5-तज़किये नफस़: झूठ, गीबत,और बदगोई से परहेज़ करें ताकि रोज़ा महज़ भूख और प्यास न बने।

रमजानुल मुबारक में आसमान के दरवाजे खोल दिए जाते हैं।और शैतान क़ैद कर दिए जाते हैं और नेकियों का सावन सत्तर गुना तक बढ़ा दिया जाता है। इस महीने में अल्लाह ताला अपने बंदों को बख़्श देता है ,इस लिए मुसलमानो का फर्ज है के वोह अपना वक़्त फ़िज़ूल कामों में, से सोशल मीडिया और बाजारों में खराब करने के बजाए तरावीह, ज़िकरो, अज़कार,और सद का वा खैरात में गुजारें। और रही बात इस्तकबाले रमज़ान तो इस्तीकबाले रमज़ान सिर्फ मुबारक बाद देने का नाम नहीं है, बल्कि इस मुकद्दस महीने का एहतेराम और उसके मक़ासिद को समझने का नाम है ,अगर हमने इस महीने के क़दर की और सच्चे दिल से इबादत किए ,तो यकीनन हम तक्वा और रज़ाए इलाही हासिल कर सकते हैं अल्लाह ताला हमें रमजानुल मुबारक के बरकात समेटने की तौफीक़ अता फरमाए आमीन। मोहम्मद तौफीक़ अहमद मिस्बाही। मस्जिद ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ शहडोल।

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