इंसानियत का जज्बा पैदा करते हैं रमजान के रोजे-साजिद खान

इंसानियत का जज्बा पैदा करते हैं रमजान के रोजे-साजिद खान


Junaid Khan - शहडोल। इस्लाम एक संपूर्ण जीवन व्यवस्था है जिसकी सभी शिक्षाएं और व्यवस्थाएं मानव स्वभाव के अनुकूल और पूर्ण है। इस्लामी जीवन व्यवस्था की इमारत पांच स्तंभों पर खड़ी होती है। 1.इस बात की गवाही देना कि अल्लाह की सिवा कोई बंदगी (उपासना) के लायक नहीं और हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम अल्लाह के रसूल (संदेशवाहक) हैं 2.दिन में पांच बार नमाज अदा करना 3. जो आर्थिक रूप से संपन्न है उन्हें अपनी वार्षिक कमाई का ढाई प्रतिशत जकात अदा करना 4. जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं उन्हें जीवन भर में एक बार हज करना 5.साल में रमजान माह में एक माह के रोजे रखना अनिवार्य है। रमजान और रोजे के संबंध में प्रेस को जारी अपने संदेश में प्रदेश के प्रसिद्ध युवा पत्रकार इस्लामी साहित्यकार साजिद खान धनपुरी ने बताया कि रमजान माह में अल्लाह ने अपने फरिश्ते जिब्राइल अलैहिस्सलाम के अभिभाषण के जरिए मानव जाति के मार्गदर्शन के लिए अपनी आखिरी किताब कुरान मजीद का अवतरण अपने आखिरी नबी रसूल पैगंबरें इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर प्रारंभ किया जिसका शीर्षक मानव है और कुरान का विषय मानव का मार्गदर्शन है और कुरान का रक्षक अल्लाह स्वयं है क्योंकि यह सारी मानव जाति की आखिरी ईश्वरीय संदेश और धरोहर है। रोजे रखने के चार महत्वपूर्ण कारण है 1.अल्लाह ने रमजान में कुरान अवतरित किया इसलिए रोजा रखते अल्लाह का आभार व्यक्त करना। 2 आत्म संयम पैदा करने की भावना के साथ ही भूखे प्यासे रहते हुए जीवन संघर्ष की शक्ति प्राप्त करना।3. निर्धनों भूखा प्रयासों के प्रति हमदर्दी पैदा करने और उनकी तकलीफों का एहसास करते हुए अपने माल वा दौलत से उनकी मदद करना ताकि वह भी समाज में सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सके। 4.रोजे के जरिए अपने शरीर को स्वस्थता का लाभ प्रदान करना जिससे कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल होता है और विशेष कर पेट की और बलगामी बीमारियां खत्म हो जाती है और कब्ज दूर हो जाता है और पेट हल्का हो जाता है। रमजान कुरान के अवतरण का वार्षिक उत्सव है यह मुसलमान को अल्लाह के समस्त बंदों तक कुरान का संदेश पहुंचाने का अवसर प्रदान करता है जो उनकी जिम्मेदारी है नहीं तो उनकी अल्लाह के यहां कल सख्त पकड़ होगी। आप सभी से गुजारिश है आप आप सब दुआ फरमाए कि मेरी प्यारीअम्मी हज्जन जुबेदा बी रहमतुल्लाहि अलैहा और अब्बू जनाब बाबू खान कादिरी साहब कि अल्लाह उनकी मगफिरत फरमाए और उनके दरजात को बुलंद फरमाए और मेरी खताओं को माफ फरमाए और मेरी और आप सबकी नेक तमन्नाएं पूरी फरमाए आमीन या रब्बुल आलमीन।

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