स्वर्ण समाज नें भरी हुंकार यूजीसी के खिलाफ धरना और आमसभा

स्वर्ण समाज नें भरी हुंकार यूजीसी के खिलाफ धरना और आमसभा 


Junaid khan - शहडोल। स्वर्ण समाज द्वारा यूजीसी की नीतियों के खिलाफ दिनांक 06 फरवरी कों जयस्तंभ चौक पर विशाल धरना प्रदर्शन और आमसभा का आयोजन होगा। यह धरना प्रदर्शन और आम सभा मुख्य रूप से आरक्षण नीतियों में बदलाव और उच्च शिक्षा में समान अवसरों की मांग को हो रहा है। शहडोल जिला मुख्यालय पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की कुछ प्रस्तावित नीतियों और मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ एक विशाल धरना प्रदर्शन और आमसभा का आयोजन होगा। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों के हितों की रक्षा करना और व्यवस्था में "समानता" लाना बताया गया।

1. प्रदर्शन के मुख्य कारण और माँगें स्वर्ण समाज का यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित रहेगा। आरक्षण की समीक्षा: स्वर्ण समाज का तर्क रहेगा कि यूजीसी और उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था का लाभ केवल आर्थिक रूप से पिछड़ों को मिलना चाहिए, न कि जाति के आधार पर। पदोन्नति में आरक्षण का विरोध: उच्च शिक्षा और शैक्षणिक पदों पर पदोन्नति में आरक्षण को लेकर समाज ने कड़ा ऐतराज जतायेगा। क्रीमी लेयर का मुद्दा: स्वर्ण समाज की मांग रहेगी कि सभी वर्गों के लिए 'क्रीमी लेयर' के मापदंड सख्ती से लागू हों ताकि वास्तविक पात्रों को ही लाभ मिले। एट्रोसिटी एक्ट का विरोध: सभा में एससी-एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग पर भी चर्चा होगी और इसमें संशोधन की मांग दोहराई गई। 

2.आंदोलन का स्वरूप शहडोल के हृदय स्थल पर आयोजित इस आमसभा में भारी संख्या में युवा, प्रबुद्ध नागरिक और विभिन्न स्वर्ण संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। प्रभात फेरी भी निकलेगी : स्वर्ण समाज द्वारा दोपहर करीब दो बजे कलेक्ट्रेट कार्यालय तक शांतिपूर्ण ढंग से प्रभात फेरी भी निकाली जाएगी। और अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से रखा जाएगा। ज्ञापन सौंपना: आंदोलन के अंत में राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा , जिसमें यूजीसी की नीतियों में सुधार की अपील की जाएगी। उक्त धरना प्रदर्शन में मुख्य रूप से पंडित बाल्मीक गौतम,सुनील खरे,गणेश सिंह दादू,संजय मिश्रा सुभाष चतुर्वेदी एड राकेश सिंह बघेल एवं अन्य गणमान्य नागरिक शामिल होंगे।आमसभा के दौरान मंच से बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि "योग्यता की अनदेखी राष्ट्रहित में नहीं है।" उन्होंने जोर दिया कि: हम किसी वर्ग के विरोधी नहीं हैं, लेकिन हम चाहते हैं कि सामान्य वर्ग के गरीब और प्रतिभाशाली छात्रों को भी आगे बढ़ने का समान अवसर मिले। यूजीसी की कुछ नीतियां सामान्य वर्ग के भविष्य को अंधकार में डाल रही हैं। 

निष्कर्ष

शहडोल में हुआ यह प्रदर्शन इस बात का प्रतीक है कि स्वर्ण समाज अब अपने अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए संगठित हो रहा है। प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए इसे उचित माध्यम से शासन तक पहुँचाने का आश्वासन दिया है। अब यह देखना होगा कि सरकार और यूजीसी इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।

Previous Post Next Post