शहर के बीचो-बीच कानून की धज्जियां पार्किंग स्थल की दीवार तोड़कर अवैध कब्जा, प्रशासन मौन क्यों?

नवरात्रि से पहले अतिक्रमण का खेल,श्रद्धालुओं और व्यापारियों में आक्रोश



Junaid khan - शहडोल। शहर के प्रमुख धार्मिक स्थल श्री विराटेश्वरी धाम दुर्गा माता मंदिर के ठीक सामने स्थित सार्वजनिक पार्किंग स्थल पर नगर पालिका द्वारा निर्मित बाउंड्री वॉल को रविवार की रात असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ दिया गया। हैरानी की बात यह है कि सोमवार सुबह तक कथित अवैध दुकान पर शटर भी लगा दिया गया। यह पूरा घटनाक्रम न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि शहर के बीचो-बीच नजूल भूमि पर खुलेआम कब्जा कराया जा रहा है और जिम्मेदार विभाग खामोश हैं। भूमाफियाओं के हौसले बुलंद, नजूल जमीन की खुलेआम बिक्री जानकारी के अनुसार मंदिर के सामने स्थित नजूल भूमि को कुछ भूमाफियाओं द्वारा पहले ही बेचकर दुकान का निर्माण कराया जा चुका था। नगर पालिका की बाउंड्री वॉल इस अवैध निर्माण के आड़े आ रही थी, इसलिए रातों-रात दीवार गिरा दी गई। सवाल यह है कि किसके इशारे पर यह कार्रवाई हुई? क्या बिना राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण के ऐसा संभव है? पार्किंग खत्म, शहर जाम नवरात्रि में संकट और गहराएगा पूरा बाजार क्षेत्र पहले से ही पार्किंग संकट से जूझ रहा है। मंदिर के सामने की सार्वजनिक पार्किंग पर कब्जा होने से आम नागरिकों, श्रद्धालुओं और व्यापारियों को भारी परेशानी होगी। नवरात्रि जैसे बड़े पर्व के दौरान जब हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, तब यह अतिक्रमण सुरक्षा और यातायात व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल नगर पालिका की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, नजूल भूमि पर कब्जा हुआ, फिर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। न तो एफआईआर की पुष्टि, न ही तत्काल तोड़फोड़ रोकने की पह यह चुप्पी किस बात का संकेत है? नियम-कानून और गाइडलाइन (लीड के तौर पर) नजूल भूमि सार्वजनिक संपत्ति होती है; इसकी बिक्री, खरीद या निर्माण पूर्णतः अवैध है। नगर पालिका अधिनियम के तहत सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है; दोषियों पर एफआईआर, जुर्माना और जेल का प्रावधान है। अवैध निर्माण पर तत्काल सीलिंग, ध्वस्तीकरण और निर्माण सामग्री जब्ती अनिवार्य है। पार्किंग स्थल पर अतिक्रमण होने से यातायात बाधित होने पर यातायात अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। पर्व-त्योहारों के समय धार्मिक स्थलों के आसपास नो-अतिक्रमण जोन लागू करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

मांग नगर पालिका की दीवार तोड़ने और अवैध शटर लगाने वालों पर तत्काल एफआईआर दर्ज हो। अवैध दुकान को सील कर ध्वस्त किया जाए। नजूल भूमि बेचने-बदलने वाले भूमाफियाओं पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। नवरात्रि से पहले मंदिर क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कर पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अब सवाल साफ है।क्या प्रशासन जागेगा, या शहर की सार्वजनिक जमीन इसी तरह कब्जे की भेंट चढ़ती रहेगी?

Previous Post Next Post