एआई समिट विवाद पर सियासत गरम,शहडोल में भाजयुमो का प्रदर्शन,राहुल गांधी का पुतला दहन

एआई समिट विवाद पर सियासत गरम,शहडोल में भाजयुमो का प्रदर्शन,राहुल गांधी का पुतला दहन





Junaid khan - शहडोल। नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित ‘एआई समिट’ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर कथित रूप से हुए घटनाक्रम को लेकर देश की राजनीति में तीखा घमासान छिड़ गया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) ने इसे राष्ट्र की छवि के खिलाफ कृत्य बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इसी क्रम में शनिवार को शहडोल में कांग्रेस भवन के सामने भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का पुतला दहन कर प्रदर्शन किया और जोरदार नारेबाजी की। भाजयुमो पदाधिकारियों का आरोप है कि जब भारत वैश्विक मंचों पर अपनी तकनीकी क्षमता, नवाचार और नेतृत्व का परिचय दे रहा है, ऐसे समय में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या विरोध प्रदर्शन देश की गरिमा को आघात पहुँचाता है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में राजनीतिक मतभेदों को इस प्रकार प्रदर्शित करना राष्ट्रहित के प्रतिकूल है और इससे विश्व समुदाय में भारत की छवि प्रभावित होती है।

राष्ट्र सम्मान सर्वोपरि भाजयुमो 

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे अवसर देश के लिए गौरव के क्षण होते हैं, जहाँ पूरी दुनिया भारत की उपलब्धियों को देखती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रतिष्ठा के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद 

इस विरोध कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष व जयसिंहनगर विधायक श्रीमती मनीषा सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीमती अमिता चपरा, भाजयुमो प्रदेश सह सोशल मीडिया प्रभारी श्री ज्ञानेन्द्र शुक्ला, जिलाध्यक्ष भाजयुमो शहडोल प्रियम त्रिपाठी, उमरिया जिलाध्यक्ष अमित सिंह, अनूपपुर जिलाध्यक्ष रविंद्र राठौर सहित पार्टी एवं युवा मोर्चा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि देशहित सर्वोपरि है और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर आवाज उठाते रहेंगे।

राजनीतिक तापमान और बढ़ने के संकेत एआई समिट से जुड़े घटनाक्रम के बाद जिस तरह देशभर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है, उससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। शहडोल में हुए इस प्रदर्शन ने साफ संकेत दे दिया है कि स्थानीय स्तर पर भी इस विषय को लेकर सियासी तापमान चढ़ा हुआ है। राष्ट्र की छवि, वैश्विक मंच और आंतरिक राजनीति के बीच संतुलन कैसे बने यह अब देश की राजनीति के लिए एक अहम प्रश्न बनता जा रहा है।

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