ग्रामीणों ने खनिज अधिकारी को सौंपा शिकायत पत्र, कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
Junaid khan - शहडोल। जिले की सोहागपुर तहसील अंतर्गत ग्राम जमुई में अवैध उत्खनन का गंभीर मामला सामने आया है। गांव के ग्रामीणों ने एकजुट होकर खनिज विभाग को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि हेलीपैड के पीछे स्थित शासकीय एवं पट्टे की भूमि से बिना किसी वैध अनुमति के बड़े पैमाने पर मुरूम और पत्थर का अवैध खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिदिन कई ट्रैक्टरों में मुरूम और पत्थरों की ढुलाई की जा रही है। यह कार्य खुलेआम दिनदहाड़े किया जा रहा है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि भूमि स्वामियों द्वारा मना करने के बावजूद कथित मुरूम कारोबारी धड़ल्ले से खुदाई कर रहे हैं। जमीन हो रही बंजर, बढ़ रहा हादसों का खतरा ग्रामीणों ने बताया कि लगातार की जा रही खुदाई के कारण क्षेत्र पूरी तरह ऊबड़-खाबड़ हो चुका है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बरसात के मौसम में पानी भरने से दुर्घटनाओं की आशंका और अधिक बढ़ जाएगी। स्थानीय किसानों का कहना है कि इससे जमीन की उपजाऊ क्षमता प्रभावित हो रही है। यदि समय रहते इस अवैध उत्खनन पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में यह भूमि पूरी तरह बंजर हो सकती है। बच्चों और मवेशियों के लिए भी यह गड्ढे खतरा बन चुके हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि कई दिनों से यह अवैध गतिविधि जारी है, बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों ने आशंका जताई है कि यदि इस प्रकार की गतिविधियों को संरक्षण मिला तो पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ सकता है। खनन नियमों के अनुसार शासकीय भूमि से बिना अनुमति खनिज उत्खनन करना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में मशीनरी जब्ती, जुर्माना और आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने का प्रावधान है।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही मौके का निरीक्षण कर दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे मजबूर होकर उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि पूरे गांव की सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा विषय है। ग्रामीणों ने खनिज विभाग से मांग की है कि तत्काल संयुक्त निरीक्षण कर अवैध उत्खनन पर रोक लगाई जाए, दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए और क्षतिग्रस्त भूमि का समतलीकरण कराया जाए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और ग्रामीणों की शिकायत पर कब तक कार्रवाई होती है।
