पाखंडी बाबा के 'पाप' का अंत: 75 साल के दरिंदे को 20 वर्ष का कठोर कारावास
Junaid Khan - शहडोल। कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पॉक्सो एक्ट के तहत ददन तिवारी को मिली उम्रकैद जैसी सजा; जज बोले- 'अपराधी चाहे सफेदपोश हो या उम्रदराज, कानून का हंटर सब पर बराबर। शहडोल न्याय के मंदिर से एक ऐसा फैसला आया है जिसने समाज में छिपे भेड़ियों को कड़ा संदेश दिया है। जिले के जयसिंहनगर के बहुचर्चित नाबालिग दुष्कर्म मामले में विशेष न्यायालय (पॉक्सो) के न्यायाधीश शिवलाल केवट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 75 वर्षीय आरोपी ददन उर्फ ददन राम तिवारी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि उम्र की आड़ में किए गए घिनौने अपराधों के लिए कानून में कोई सहानुभूति नहीं है। घटना जिसने दहला दिया था जयसिंहनगर। यह रूह कंपा देने वाली घटना 5 मई 2023 की है। 13 साल की एक मासूम बच्ची अपने गांव के बगीचे में आम तोड़ने गई थी। घर लौटते समय रास्ते में आरोपी ददन राम तिवारी ने उसे मिठाई खिलाने के बहाने अपने घर बुलाया। बच्ची जिसे 'बाबा' समझकर सम्मान देती थी, वह असल में एक दरिंदा निकला। फरसे से काटने की धमकी और दरिंदगी। आरोपी ने मासूम को घर के अंदर खींचकर दरवाजा बंद कर लिया। जब बच्ची ने शोर मचाया, तो आरोपी ने फरुआ (फावड़ा) दिखाकर उसे जान से मारने की धमकी दी और उसका मुंह दबाकर दरिंदगी की। गनीमत रही कि ठीक उसी वक्त पीड़िता के भाई ने दरवाजा खटखटाया, जिससे बच्ची की जान बच सकी। न्याय की राह: DNA रिपोर्ट और पुलिस की मुस्तैदी। इस मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष की भूमिका सराहनीय रही। 45 दिनों में चालान: पुलिस ने महज 45 दिनों के भीतर कोर्ट में चालान पेश कर अपराधियों के मन में खौफ पैदा किया। वैज्ञानिक साक्ष्य: विशेष लोक अभियोजक नवीन कुमार वर्मा ने कोर्ट में पुख्ता दलीलें पेश कीं। सबसे महत्वपूर्ण कड़ी DNA रिपोर्ट रही, जिसने वैज्ञानिक रूप से ददन राम के गुनाह पर मुहर लगा दी। मेडिकल रिपोर्ट: आरोपी ने उम्र का हवाला देकर बचने की कोशिश की, लेकिन डॉक्टर ने मेडिकल परीक्षण में उसे अपराध करने में पूरी तरह सक्षम पाया। अदालत की सख्त टिप्पणी। अदालत ने गवाहों के बयानों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ददन राम को दोषी करार दिया। फैसले में कहा गया कि यह सजा उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो धर्म, रसूख या उम्र की आड़ में अपनी गंदी मानसिकता को छिपाए बैठे हैं। 20 साल की सजा का मतलब है कि 75 वर्षीय आरोपी की बाकी जिंदगी अब जेल की काल कोठरी में ही कटेगी। मासूम की चीखों का हिसाब अब जेल की सलाखें करेंगी। जयसिंहनगर की जनता ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि ऐसे फैसलों से ही न्यायपालिका पर आम आदमी का भरोसा और मजबूत होता है।
