ई से ईश्वर, ईद और इंसानियत,शालिनी सरावगी के विचारों ने जीता दिल
ईद मिलन में गूंजा अमन और भाईचारे का संदेश,इंसानियत और एकता की मिसाल बना मोहम्मदी वेलफेयर सोसायटी का आयोजन
Junaid Khan - शहडोल। धनपुरी ईद-उल-फितर के मुबारक और रूहानी मौके पर धनपुरी की सरज़मीं एक बार फिर मोहब्बत, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब की ख़ुशबू से महक उठी। मोहम्मदी वेलफेयर सोसायटी द्वारा वेलकम पैलेस में आयोजित ईद मिलन समारोह महज़ एक त्यौहार का आयोजन नहीं था, बल्कि यह इंसानियत, अमन, इत्तेहाद और सामाजिक सौहार्द का ऐसा पैग़ाम था, जिसने हर दिल को छू लिया और समाज के सामने एक बेहतरीन मिसाल पेश की। इस दिलनशीं महफ़िल में हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई हर मज़हब और हर तबके के लोगों की शानदार और सराहनीय मौजूदगी देखने को मिली। विविधता में एकता की भारतीय परंपरा यहां सिर्फ़ शब्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि हर शख़्स के चेहरे की मुस्कान और दिलों की गर्मजोशी में साफ़ झलकती रही। कार्यक्रम का आगाज़ बेहद पुरख़ुलूस और खुशनुमा माहौल में हुआ, जहां भाई कलाम ने अपने शायराना अंदाज़ से महफ़िल को सजाया और मोहब्बत के रंग बिखेर दिए। इस मौके पर ज़िला न्यायाधीश मोहम्मद हिदायत उल्ला ख़ान बतौर ख़ास मेहमान मौजूद रहे। उनके साथ शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी मंचासीन रहे। धनपुरी-बुढ़ार सहित आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर “ईद मुबारक” कहा और दिलों के फासले मिटाकर भाईचारे का पैग़ाम दिया। हर तरफ अपनापन, सादगी और मोहब्बत का नज़ारा देखने को मिला। मोहम्मदी वेलफेयर सोसायटी के सरपरस्त शाह आलम ख़ान, सदर मोहम्मद आज़ाद अली, सेक्रेटरी मोहम्मद अली (पप्पू), कैशियर मोहम्मद फैज़ तथा अन्य पदाधिकारियों और सहयोगियों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वक्ताओं ने अपने खिताब में कहा कि त्यौहार महज़ रस्म-अदायगी नहीं होते, बल्कि यह दिलों को जोड़ने, रिश्तों को मजबूत करने और समाज में मोहब्बत की रौशनी फैलाने का जरिया होते हैं। उन्होंने समाज में फैल रही नफ़रत, भेदभाव और तफ़रक़े को खत्म कर आपसी भाईचारे, सहिष्णुता और इंसानियत को अपनाने की अपील की। नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती शालिनी सरावगी ने अपने उद्बोधन में आधुनिक दौर की बदलती तस्वीर का जिक्र करते हुए कहा कि भले ही आज का युग डिजिटल हो गया हो, लेकिन “ई” का असली मायने आज भी कायम हैं। ई से ईश्वर, ई से ईद और ई से इंसानियत। उनके इस विचार ने महफ़िल में मौजूद हर शख़्स के दिल को छू लिया और तालियों की गूंज से पूरा वातावरण गूंज उठा। पूर्व विधायक छोटेलाल सरावगी (खुद्दी भैया) ने अपने अनुभवी और भावुक शब्दों में नई पीढ़ी को नसीहत देते हुए कहा कि बदलते समय के साथ हमारी तहज़ीब और संस्कार कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं। उन्होंने अफ़सोस जताया कि आज के बच्चे बड़ों का सम्मान करना भूलते जा रहे हैं, जो समाज के लिए चिंताजनक है। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को संस्कार, अदब और तहज़ीब की तालीम दें, ताकि समाज में आपसी इज़्ज़त और मोहब्बत कायम रह सके। उन्होंने यह भी कहा कि जहां कहीं भी गंगा-जमुनी तहज़ीब और सांस्कृतिक एकता की बात हो, वहां हम सबको कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना चाहिए। उन्होंने भावुकता के साथ यह वादा भी किया कि यदि ईश्वर ने चाहा, तो आने वाले समय में दीपावली मिलन समारोह भी इसी तरह सामूहिक रूप से आयोजित किया जाएगा। ज़िला न्यायाधीश हिदायत उल्ला ख़ान ने अपने विचारों में मोहब्बत, अमन और इंसानियत का पैग़ाम देते हुए कहा कि यदि दिलों में दूरियां बढ़ती रहीं, तो रिश्तों की गर्माहट समाप्त हो जाएगी। उन्होंने लोक अदालत का उल्लेख करते हुए बताया कि यह एक ऐसा सशक्त मंच है, जहां लोग आपसी रज़ामंदी और समझदारी से अपने विवाद सुलझाते हैं, जिससे समाज में भाईचारा और विश्वास बढ़ता है। अपने ख़ास अंदाज़ में उन्होंने एक मार्मिक शायरी पेश कर महफ़िल को रूहानी एहसास से भर दिया। प्रेम से चाहतों के दिए अब घरोंमें जलाएगा कौन? यूँ ही लड़ते अगर हम रहे, तो मोहब्बत निभाएगा कौन...होली रंगों का त्योहार है, ईद दरिया है रहमत भरा, दिल अगर दूर होते रहे, तो गले से लगाएगा कौन इन पंक्तियों ने वहां मौजूद हर शख़्स के दिल को छू लिया और पूरा माहौल तालियों और जज़्बातों से गूंज उठा। कार्यक्रम में पूर्व विधायक छोटेलाल सरावगी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अजय अवस्थी, बलमीत सिंह खनूजा, हनुमान खंडेलवाल, सुजीत सिंह चंदेल, राजेश चमडिया, मुबारक मास्टर, रोहणी गर्ग, राजू सेठिया, मनोज जैन, पुष्पेंद्र ताम्रकार, पियूष शुक्ला, अरविंद जैन, बबलू सिंह, नसीर राजा, प्रकाश कृष्णानी सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस पूरे आयोजन को अपने कैमरे में कैद करने की जिम्मेदारी वरिष्ठ पत्रकार अतीक खान बाबा, विनय मिश्रा, अनिल लहंगीर, अविनाश शर्मा और रजनीश शर्मा ने बखूबी निभाई। अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि भारत की असली ताकत उसकी एकता, विविधता और गंगा जमुनी तहज़ीब में निहित है, और इसे बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यह आयोजन इस बात का जीता-जागता सबूत बन गया कि जब दिल जुड़ते हैं, तो नफ़रत की हर दीवार अपने आप गिर जाती है और समाज में मोहब्बत,अमन और इंसानियत की रौशनी फैल जाती है।


