क्रेशरों में धड़ल्ले से अवैध खनन,विभाग मौन,माइनिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल,निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता?
Junaid Khan - शहडोल। जिले में पत्थर और रेत के अवैध खनन को लेकर माइनिंग विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि विभाग में पदस्थ अभिषेक के कार्यकाल में जिले के कई इलाकों में अवैध खनन और परिवहन का सिलसिला लगातार जारी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर स्थिति लगभग शून्य बनी हुई है। जानकारी के अनुसार शहडोल शहर से महज लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर संचालित कई क्रेशरों में लगातार अवैध रूप से पत्थरों का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब खुलेआम चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद आज तक किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होना लाजिमी है। इतना ही नहीं, जिले की कई पत्थर खदानों में भी बिना निर्धारित मापदंडों और नियमों के खनन किया जा रहा है। खदानों में गहराई, सुरक्षा मानकों और स्वीकृत सीमाओं की अनदेखी करते हुए लगातार उत्खनन किया जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक किसी भी पत्थर खदान पर विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि अधिकारी क्षेत्र का दौरा तो करते हैं, लेकिन इन दौरों के बाद भी अवैध खनन पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाता। लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया है और खनन से जुड़े लोगों से मुलाकात के बाद बिना किसी कार्रवाई के ही मामला खत्म हो जाता है। चर्चा यह भी है कि इस पूरे खेल को जिला खनिज अधिकारी को अंधेरे में रखकर संचालित किया जा रहा है। यदि ऐसा है तो यह स्थिति और भी गंभीर है, क्योंकि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी के बिना इस तरह का अवैध खनन लंबे समय तक चलना कई सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब खुलेआम क्रेशरों और पत्थर खदानों में अवैध उत्खनन और परिवहन हो रहा है, तो आखिर अब तक कितने प्रकरण दर्ज किए गए, कितनी जब्ती हुई और कितनी सख्त कार्रवाई की गई। यदि कार्रवाई नहीं हुई तो यह प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जिले में लगातार हो रहे अवैध खनन से शासन को राजस्व की भारी क्षति के साथ-साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में अब लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
