दलालों का खेल फिर शुरू: गुटखा पाउच के दामों में मनमानी बढ़ोतरी, उपभोक्ता और छोटे दुकानदार परेशान

कंपनी के निर्देश बिना बढ़ाए गए रेट, कालाबाजारी से लाखों का खेल जिम्मेदार विभाग की भूमिका पर उठे सवाल 


Junaid khan - शहडोल। संभाग के बाजारों में एक बार फिर गुटखा कारोबार से जुड़े दलालों और बड़े डीलरों की मनमानी सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजश्री समेत विभिन्न ब्रांड के गुटखा पाउच के दाम बिना किसी आधिकारिक निर्देश के अचानक बढ़ा दिए गए हैं। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ छोटे दुकानदारों पर भी सीधा असर पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि बड़े डीलर पहले जानबूझकर बाजार में सप्लाई कम कर देते हैं और फिर अपने एजेंटों व दलालों के जरिए यह अफवाह फैलाते हैं कि कंपनी ने रेट बढ़ा दिए हैं। इसी बहाने गुटखा पाउच के दामों में मनमानी बढ़ोतरी कर दी जाती है। वर्तमान में ₹20 का पाउच ₹25 तक और ₹40 का गुटखा ₹50 तक बेचा जा रहा है।

कालाबाजारी का पुराना खेल,त्योहारों में ज्यादा सक्रिय

यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की स्थिति बनी हो। इससे पहले कोरोना काल के दौरान भी गुटखा की कीमतों में भारी उछाल देखा गया था, जहां ₹20 का पाउच ₹100 से ₹200 तक बेचा गया। हाल ही में होली के समय भी इसी तरह की कोशिश की गई थी, लेकिन सोशल मीडिया पर विरोध के बाद मामला शांत हो गया था। सूत्रों का कहना है कि डीलर कई बार लाखों रुपये का माल गोदाम में रोककर रखते हैं और कृत्रिम कमी पैदा करते हैं। इसके बाद बढ़े हुए दामों पर माल बेचकर कुछ ही दिनों में लाखों से करोड़ों का मुनाफा कमा लेते हैं।

छोटे दुकानदार बेबस, ग्राहक नाराज 

फुटकर व्यापारियों का कहना है कि वे खुद मजबूर हैं क्योंकि उन्हें ऊपर से ही बढ़े हुए रेट पर माल मिल रहा है। ऐसे में या तो वे घाटा सहें या ग्राहकों को महंगा माल बेचें। कई दुकानदारों ने यह भी बताया कि उन्हें सही रेट की कोई पक्की रसीद तक नहीं दी जाती, जिससे उनकी स्थिति और कठिन हो जाती है।

क्या कहता है कानून?

नियम स्पष्ट हैं कि किसी भी उत्पाद पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक कीमत पर बिक्री करना गैरकानूनी है। यदि कोई व्यापारी तय कीमत से ज्यादा वसूली करता है, तो उसके खिलाफ संबंधित थाने या प्रशासनिक विभाग में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

जिम्मेदार विभाग पर उठ रहे सवाल 

इस पूरे मामले में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है। बाजार में खुलेआम हो रही इस मनमानी पर विभागीय निरीक्षकों की चुप्पी आम जनता के बीच अविश्वास पैदा कर रही है। लोगों का कहना है कि यदि अधिकारी छोटे दुकानदारों और बाजार में जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करें, तो सच्चाई तुरंत सामने आ सकती है।

अब निगाहें प्रशासन पर 

संभाग के नागरिकों की निगाहें अब जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं। देखना होगा कि इस बार कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

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