गांधी चौक बना खतरे का चौक: सीवर कार्य की लापरवाही से हर पल मंडरा रहा हादसे का खतरा

गांधी चौक बना खतरे का चौक: सीवर कार्य की लापरवाही से हर पल मंडरा रहा हादसे का खतरा


Junaid Khan - शहडोल। शहर का सबसे व्यस्ततम और महत्वपूर्ण यातायात केंद्र गांधी चौक इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्था का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। सीवर लाइन बिछाने का कार्य कर रही एजेंसी ने सड़क के बीचों-बीच गहरे गड्ढे खोदकर उन्हें खुले हाल में छोड़ दिया है, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

खुले गड्ढे दे रहे हादसों को न्योता

गांधी चौक से होकर प्रतिदिन हजारों की संख्या में वाहन और राहगीर गुजरते हैं। ऐसे में सड़क पर बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के छोड़े गए गड्ढे किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। खासकर रात के समय, जब दृश्यता कम होती है, तब यह खतरा और भी बढ़ जाता है।

दिनभर जाम,रात में जान का जोखिम

दिन के समय यहां भारी ट्रैफिक का दबाव रहता है, जिससे गड्ढों के कारण जाम की स्थिति बन रही है। वहीं रात में बिना संकेतक या बैरिकेडिंग के ये गड्ढे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए मौत का जाल साबित हो सकते हैं। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों ने बताया कि कई बार लोग बाल-बाल हादसे से बचे हैं।

शिकायतों के बावजूद नहीं जागा प्रशासन 

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक न तो कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही सुधार के लिए ठोस कदम उठाए गए। इससे लोगों में भारी आक्रोश है।

जिम्मेदारी से बचता कौन? 

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि यहां कोई बड़ा हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? या फिर जनसुरक्षा केवल कागजों तक सीमित रह गई है?

प्रशासन की अनदेखी पड़ सकती है भारी 

यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो गांधी चौक किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है। प्रशासन और संबंधित एजेंसी को तत्काल संज्ञान लेते हुए गड्ढों को भरने, उचित बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत लगाने की आवश्यकता है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं और शहरवासियों को इस खतरे से राहत दिलाते हैं, या फिर कोई बड़ा हादसा ही प्रशासन को जगाएगा।

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