यह सिर्फ जमीन की लूट नहीं यह सिस्टम,सत्ता और साजिश का संगठित खेल है...!
Junaid Khan - शहडोल। अगर आप इसे केवल % अवैध प्लॉटिंग% कह रहे हैं, तो आप इस शहर के साथ हो रहे % नरसंहार% को कम आंक रहे है। मध्य प्रदेश सरकार चिल्ला-चिल्ला कर कहती है कि बिना रेरा रजिस्ट्रेशन के कोई भी कॉलोनी नहीं कटेगी। लेकिन शहडोल में रेरा के नियमों को इन माफियाओं ने अपने पैरों की जूती बना रखा है। जिले के प्रशासनिक मुखिया का % मौन% कई सवाल खड़े करता है। क्या प्रशासन को दिखाई नहीं देता कि जिले की उपजाऊ कृषि भूमि कंक्रीट के अवैध जंगल में बदल रही है.... या फिर ऊपर तक पहुंचने वाली मलाई ने सबकी आंखों पर पट्टी बांध दी है शहर के चारों ओर सोहागपुर, बिचारपुर, छतवई, पिपरिया, छतरपुर, गोरतरा, कोट मा, कल्याणपुर बुढ़ार, सिंहपुर और जैतपुर रोड पर-भू-माफियाओं ने अपनी % हवस% का ऐसा जाल बुना है कि आने वाले समय में यहाँ इंसान नहीं, सिर्फ % कंक्रीट के कंकाल% बसेंगे। यह सोचना कि अवैध प्लॉटिंग केवल कुछ चंद भू-माफियाओं का दुस्साहस है, एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। हकीकत तो यह है कि शहडोल में खेतों की छाती पर जो अवैध कॉलोनियों का जाल बिछाया जा रहा है, उसे % प्रशासनिक खाद% और % राजनीतिक पानी% मिल रहा है। बिना सरकारी तंत्र की % मूक सहमति% और % मलाईदार साझेदारी के, किसी माफिया की इतनी मजाल नहीं कि वह कलेक्टर और कमिश्नर की नाक के नीचे शहर का भूगोल बदल दे।
सफेदपोश कसाई और चूने की खूनी लकीरें
शहडोल की उपजाऊ कोख को चीरकर जो चूने की लकीरें खींची जा रही हैं, वे असल में आम आदमी की गर्दन पर खिंची तलवारें हैं। ये कॉलोनाइजर नहीं, ये % सफेदपोश कसाई% हैं।? शहडोल के चारों ओर जो शहडोल में अवैध प्लॉटिंगः शहर को दीमक की तरह चारः रहा है माफिया का तांडव' आज ही रोकें या भविष्य खो दें। सफेद चूने की लकीरें रातों-रात खींच दी जाती हैं, वे महज किसी कॉलोनी का नक्शा नहीं हैं-वे इस शहर के भूगोल की हत्या करने वाली % खूनी लकीरें हैं। इन लकीरों को खींचने वाले हाथ किसी अपराधी के नहीं, बल्कि उन % सफेदपोश कसाइयों के हैं जो दिन में समाज के रक्षक बनते हैं और रात में भू-माफिया बनकर मासूमों के सपनों का गला घोंटते हैं। ये कसाई सिर्फ जमीन नहीं काट रहे, ये शहडोल के आने वाले कल का दम घोंट रहे हैं। जहाँ कल तक लहलहाती फसलें थीं, वहां आज इन दरिंदों ने कंक्रीट का ऐसा जाल बिछा दिया है जिससे निकल पाना नामुमकिन है। प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा यह % जमीन का कत्लखाना चीख चीख कर कह रहा है कि यहाँ कानून मर चुका है और नोटों की गड्डी ने अधिकारियों की जुबान पर ताला जड़ दिया है।
कलेक्टर की चुप्पी या भ्रष्टाचार की मलाई
जिले के प्रशासनिक मुखिया और राजस्व विभाग के आला अधिकारी आखिर किस% अफीम की नींद सो रहे हैं..? जिले के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक अजीब सी खामोशी पसरी हुई है। यह खामोशी % शांति % की नहीं, बल्कि उस % सांठगांठ% की है जो माफियाओं के साथ मिलकर शहडोल की जमीन का सौदा कर रही है। जिले के सर्वोच्च पद पर बैठे कलेक्टर साहब की नाक के नीचे सोहागपुर से लेकर बुढ़ार तक करोड़ों का % अवैध साम्राज्य% खड़ा हो गया, लेकिन साहेब की कलम की स्याही शायद माफियाओं के % गुलाबी नोटों के वजन से सूख गई है। जब एक गरीब आदमी सरकारी जमीन पर छप्पर डालता है, तो पूरा प्रशासनिक अमला बुल्डोजर लेकर चढ़ दौड़ता है। लेकिन जब ये बड़े बाप की बिगड़ी औलादें और % रसूखदार गुंडे% सैकड़ों एकड़ जमीन निगल रहे हैं, तो साहेब की % कलम% को लकवा क्यों मार जाता है.....?
पटवारी की मौन सहमति और आरआई की नजर अंदाजी
राजस्व विभाग की सबसे निचली लेकिन सबसे की प्रभावशाली कड़ी-हल्का पटवारी। शहडोल के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग का हर खेल पटवारी के % बस्ते से शुरू होकर आरआई % नजरअंदाजी की मुहर के साथ परवान चढ़ता है। नियमानुसार, कृषि भूमि पर बिना डायवर्जन (व्यपवर्तन) के एक ईंट भी रखना अपराध है, लेकिन यहाँ तो सैकड़ों एकड़ जमीन पर चूने की लकीरें खिंच जाती हैं और पटवारी साहब को सांप सूंघ जाता है।
शहडोल एक आगामी नरक की दहलीज पर
आज जो आप % सस्ता प्लाट% समझकर खरीद रहे हैं, वह कल आपके बच्चों के लिए % ज़हर की पुड़िया साबित होगा। आज आप जिसे सस्ता और सुंदर प्लॉट% समझकर अपनी जीवन भर की कमाई लुटा रहे हैं, यकीन मानिए-वह आपके बच्चों के लिए % नरक का प्रवेश द्वार है। शहडोल के चारों ओर जिस तरह बिना मास्टर प्लान, बिना ड्रेनेज और बिना तकनीकी मापदंडों के अवैध कॉलोनियों का % कैंसर% फैल रहा है, वह अगले 5 से 10 वर्षों में इस शहर को एक % कंक्रीट के दलदल% में तब्दील कर देगा। शहडोल का टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग और नगर पालिका सिर्फ तमाशबीन बने हुए हैं। आज जो अवैध निर्माण % नजरअंदाज% किया जा रहा है, वह कल प्रशासन के लिए % गले की हड्डी% बनेगा। जब लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए सड़कों पर उतरेंगे, तब यही अधिकारी कहेंगे कि कॉलोनी अवैध है, हम कुछ नहीं कर सकते।
सरकारी नक्शों का कत्लेआम और माफिया की नपाई
अगर आप सोचते हैं कि सीमांकन का मतलब सिर्फ जमीन की नपाई है, तो आप गलत हैं। शहडोल के भू-माफियाओं के लिए सीमांकन का मतलब है-% सरकारी जमीन को हड़पने का कानूनी रास्ता%। पटवारी और आरआई की मिलीभगत से होने वाला यह खेल इतना खतरनाक है कि रातों-रात सरकारी पहाड़, चरनोई भूमि और आदिवासियों की जमीनें भू-माफिया के निजी % प्लॉट% बन जाती हैं।राजस्व रिकॉर्ड के पुराने नक्शों के साथ छेड़छाड़ की जाती है। माफिया की कम कीमती जमीन को मुख्य मार्ग पर दिखा दिया जाता है, और सरकारी जमीन या रास्ते की जमीन को माफिया के खसरे में जोड़ दिया जाता है। जब भौतिक रूप से सीमांकन होता है, तो आरआई साहब उसी % फर्जी संशोधित नक्शे% के आधार पर पत्थर गाड़ देते हैं, जिससे अवैध कॉलोनी का रास्ता साफ हो जाता है।
