एसपी से की गई शिकायत, जेल स्टाफ पर गंभीर आरोप, जांच की उठी मांग
Junaid Khan - शहडोल। जिले के बुढार स्थित उपजेल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। यहां जेल स्टाफ द्वारा एक बंदी के साथ मारपीट और अमानवीय व्यवहार किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। इस पूरे मामले की शिकायत सीधे पुलिस अधीक्षक (एसपी) को दी गई है, जिससे जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। जेल स्टाफ पर मारपीट और अभद्रता के आरोप शिकायत में बताया गया है कि बुढार उपजेल में बंद एक आरोपी के साथ जेल स्टाफ द्वारा मारपीट की गई। इतना ही नहीं, आरोप है कि उसके साथ अभद्र व्यवहार भी किया गया, जिससे उसकी हालत खराब हो गई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह घटना न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि जेल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है।
एसपी को सौंपा गया शिकायत पत्र
मामले को लेकर पीड़ित के परिजनों द्वारा पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में पूरे घटनाक्रम का विस्तार से उल्लेख करते हुए दोषी जेल कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्च स्तर पर भी गुहार लगाएंगे।
न्यायालय पेशी के दौरान उजागर हुआ मामला
बताया जा रहा है कि 16 मार्च 2026 को आरोपी को न्यायालय में पेशी के लिए लाया गया था। इसी दौरान उसने अपने साथ हुई मारपीट और दुर्व्यवहार की जानकारी परिजनों को दी। परिजनों ने आरोपी की स्थिति देखकर तुरंत इस मामले को गंभीरता से लिया और अधिकारियों से शिकायत करने का निर्णय लिया।
जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना के बाद उपजेल बुढार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि जेल के भीतर ही बंदियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं है, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। लोगों का यह भी कहना है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में दोषियों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं।
जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर अब पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। शिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने का आश्वासन दिया है। मानवाधिकारों का सवाल, जवाबदेही जरूरी यह मामला केवल एक बंदी के साथ मारपीट का नहीं, बल्कि मानवाधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। जेल जैसी संवेदनशील व्यवस्था में यदि इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करती हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।
