व्यवस्थाओं में होगा पारदर्शिता का नया दौर
Junaid Khan - शहडोल। सिंहपुर। क्षेत्र के प्रसिद्ध और आस्था के प्रमुख केंद्र माँ काली मंदिर को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय सामने आया है। सिंहपुर स्थित माँ काली मंदिर समिति को अब औपचारिक रूप से ट्रस्ट का दर्जा दे दिया गया है। इस संबंध में एसडीएम सोहागपुर द्वारा 18 मार्च को आदेश जारी किया गया, जिसके बाद मंदिर की व्यवस्थाओं में व्यापक बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
ट्रस्ट गठन से प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत
जारी आदेश के अनुसार, नवगठित ट्रस्ट के संरक्षक स्वयं एसडीएम सोहागपुर होंगे, जबकि सचिव की जिम्मेदारी तहसीलदार सोहागपुर को सौंपी गई है। इसके अलावा ट्रस्ट की कार्यकारिणी में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य न्यासधारी सदस्य शामिल रहेंगे, जो मंदिर के संचालन और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी निभाएंगे।
आय-व्यय पर अब रहेगी कड़ी निगरानी
अब मंदिर के सभी वित्तीय लेन-देन ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित होंगे। मंदिर के बैंक खाते का संचालन अध्यक्ष और सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। यह कदम लंबे समय से चली आ रही अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
निजी उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी ट्रस्टी मंदिर की संपत्ति या आय का उपयोग निजी हित में नहीं करेगा। यदि ऐसा पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह नियम मंदिर की पवित्रता और श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों की होगी अहम भूमिका
ट्रस्ट में कई विभागों के अधिकारी भी पदेन सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। इनमें पुलिस, पीडब्ल्यूडी, विद्युत विभाग, जनपद पंचायत सोहागपुर के अधिकारी, सांसद व विधायक के प्रतिनिधि, जनपद सदस्य और ग्राम पंचायत सिंहपुर के सरपंच शामिल रहेंगे। इससे मंदिर के विकास कार्यों और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
पहले सामने आई थीं गंभीर अनियमितताएं
एसडीएम द्वारा जारी आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि मंदिर में आय-व्यय का समुचित रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा था। साथ ही, श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ावे के रूप में दी गई राशि और सामग्री का उपयोग निजी हित में किए जाने की शिकायतें भी सामने आई थीं, जिससे प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।
बैंक और संपत्ति का पूरा ब्यौरा आया सामने
जांच के दौरान यह सामने आया कि मंदिर के बैंक खाते में 29 हजार 325 रुपये जमा हैं, जबकि नगद राशि 26 हजार 3 रुपये पाई गई। इसके अलावा मंदिर में 99.620 ग्राम सोना और 3 किलो 620 ग्राम चांदी भी मौजूद है। अब इन सभी संपत्तियों का प्रबंधन ट्रस्ट के नियमों के तहत किया जाएगा।
ऐतिहासिक और आस्था का प्रमुख केंद्र
करीब 15 दशकों से अधिक पुराना माँ काली मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का भी अहम हिस्सा है। हर साल यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे यह स्थल आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। दो वर्ष का होगा कार्यकाल, आमसभा से होगा चयन। ट्रस्ट के पदेन सदस्यों को छोड़कर अन्य पदाधिकारियों का चयन आमसभा के माध्यम से किया जाएगा, जिनका कार्यकाल दो वर्ष का निर्धारित किया गया है। इससे स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित होगी और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। निष्कर्ष। माँ काली मंदिर समिति को ट्रस्ट का दर्जा मिलने से अब मंदिर की व्यवस्थाएं अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनेंगी। प्रशासन के इस कदम से श्रद्धालुओं में विश्वास बढ़ेगा और मंदिर के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।
