कटनी में लगा नि:शुल्क एचएलए टाइपिंग शिविर

थैलेसीमिया व सिकल सेल से पीड़ित बच्चों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट की राह आसान

50 से अधिक मरीजों के परिजनों का हुआ परीक्षण, मेदांता हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दिया उपचार संबंधी मार्गदर्शन 


Junaid Khan - शहडोल। कटनी थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवांशिक रक्त संबंधी बीमारियों से पीड़ित बच्चों को इन जन्मजात रोगों से मुक्त कराने के लिए आधुनिक चिकित्सा पद्धति बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) को प्रभावी उपचार माना जाता है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जीडी मेमोरियल हॉस्पिटल कटनी में 08 मार्च को नि:शुल्क एचएलए टाइपिंग टेस्ट शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर दिशा वेलफेयर एसोसिएशन, जीडी मेमोरियल हॉस्पिटल, मेदांता हॉस्पिटल गुड़गांव, डीकेएमएस संस्था और भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। शिविर का उद्देश्य थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट की संभावनाओं को तलाशना और उनके परिवारों को उपचार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना था। इस दौरान 50 से अधिक बच्चों के परिवारजनों का एचएलए टाइपिंग टेस्ट किया गया। यह परीक्षण बोन मैरो ट्रांसप्लांट से पहले किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण और महंगा टेस्ट होता है, जिसमें यह जांचा जाता है कि पीड़ित बच्चे के सगे भाई-बहन या माता-पिता में से किसका बोन मैरो सबसे अधिक मेल खाता है। एचएलए मैच होने के बाद ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट संभव हो पाता है। शिविर में मेदांता हॉस्पिटल गुड़गांव के वरिष्ठ बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. सत्य प्रकाश यादव ने ओपीडी के माध्यम से बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और उनके परिवारजनों को उपचार संबंधी विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने अभिभावकों को भारत सरकार की थैलेसीमिया बाल सेवा योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील करते हुए जागरूक किया।

इस अवसर पर मध्य प्रदेश रेड क्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. श्याम सिंह कुमरे ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए यथासंभव सहयोग उपलब्ध कराने का भरोसा अभिभावकों को दिया। वहीं दिशा वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से सरबजीत सिंह नारंग और रूपाली सिंघई ने ट्रांसप्लांट कराने वाले परिवारों के साथ समन्वय स्थापित कर उन्हें हर संभव मदद देने और भविष्य में देखभाल से जुड़ी जानकारी साझा कर उनका मनोबल बढ़ाया। जीडी मेमोरियल हॉस्पिटल कटनी के संचालक एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक चौदहा ने कहा कि इस तरह के शिविरों से अधिक से अधिक बच्चों के बोन मैरो ट्रांसप्लांट का मार्ग प्रशस्त होगा और उन्हें एक स्वस्थ जीवन मिल सकेगा। शिविर को सफल बनाने में विकास शुक्ला (अध्यक्ष, मध्यप्रदेश थैलेसीमिया जनजागरण समिति), शशांक श्रीवास्तव, सौरभ लखेरा, विवेक अग्रवाल, विकास खंडेलवाल और डॉ. अनमोल चौदहा का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का समापन डॉ. नितिन कुमार सिंघई द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।

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